बडगाम के किसान बासमती धान में जल्दी मंड़कने की समस्या से परेशान, जांच की मांग

बडगाम, जम्मू और कश्मीर। जिले के चेक कावूसा गाँव के कई किसानों ने अपनी बासमती धान की फसल में असामान्य रूप से जल्दी मंड़कने (premature heading) की समस्या की सूचना दी है। किसानों ने बताया कि रोपाई के कुछ ही दिनों बाद उनके धान के पौधों में फूल के सूखे मंड़की जैसे स्वरुप उभरने लगे जबकि पौधे सिकुड़े हुए और वांछित उंचाई तक नहीं पहुंच पाए हैं।
किसान दावा करते हैं कि उन्होंने कृषि विभाग द्वारा प्रदान किये गए बासमती के बीजों का उपयोग किया था, लेकिन इस अनियमित वृद्धि से उनकी फसल की पूरी पैदावार पर बुरा असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है। उनका मानना है कि इस समस्या के कारण धान के दानों का विकास अधूरा रह सकता है जिससे उत्पादकता में भारी गिरावट आएगी और आर्थिक नुकसान होगा।
किसानों ने कृषि विभाग से तत्काल मैदान में जाकर फसल का निरीक्षण करने, समस्या के कारणों की जांच करने और यदि किसी प्रकार की लापरवाही पाई जाती है तो दोषी पक्ष के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है। साथ ही प्रभावित किसानों के उचित मुआवजे की भी गुहार लगाई है ताकि उनकी आर्थिक क्षति को कुछ हद तक दूर किया जा सके।
स्थानीय कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, premature heading फसल की वृद्धि और विकास में विभिन्न कारणों से हो सकती है, जिनमें जलवायु परिवर्तनों, पोषक तत्वों की कमी या बीज गुणवत्ता में गड़बड़ी प्रमुख हैं। वहीं किसानों का कहना है कि उन्होंने इस बार नई प्रजाति के बीज लेने से पहले बाजार या अन्य स्रोत से कोई नया बीज नहीं लिया है, जिससे बीज की गुणवत्ता पर संदेह बढ़ जाता है।
कृषि विभाग के अधिकारियों ने भी इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच समिति गठित की है जो चेक कावूसा गांव पहुंचेगी और स्थिति का मूल्यांकन करेगी। विभाग ने प्रारंभिक तौर पर किसानों को आश्वासन दिया है कि समस्या की तह तक जाकर समाधान तलाशा जाएगा ताकि आगामी फसलों को बचाया जा सके।
बडगाम जिले में वर्षो से बासमती की खेती से ग्रामीण काफी आर्थिक रूप से निर्भर हैं, इसलिए किसी भी प्रकार की असामान्यता किसानों के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने प्रशासन और कृषि वैज्ञानिकों से लाभकारी सुझाव और आवश्यक सहायता प्रदान करने की भी अपील की है ताकि संकट का तुरंत निदान हो सके।
अध्ययनों के अनुसार, बासमती धान की फसल में समय से पहले मंड़कने से दाने छोटे, अधूरे और कम गुणात्मक बन सकते हैं, जिससे न केवल किसान बल्कि बाजार और निर्यात को भी नुकसान हो सकता है। अतः इस समस्या पर समय रहते ध्यान देना आवश्यक है।
किसान उम्मीद कर रहे हैं कि कृषि विभाग उनकी समस्या को प्राथमिकता देगा और जांच रिपोर्ट के आधार पर त्वरित कार्रवाई कर उचित मुआवजा एवं समाधान सुनिश्चित करेगा। इस मुद्दे से जुड़े सभी हितधारक मिलकर पारदर्शिता और सहयोग से समस्या दूर करने के प्रयास करेंगे जिससे भविष्य में ऐसी स्थिति उत्पन्न न हो।



