At NATO Summit, Trump Puts on a Show While Europe Gets Down to Businessनाटो सम्मेलन में ट्रंप ने बनाया तमाशा, जबकि यूरोप ने निपटाया महत्वपूर्ण काम

ब्रुसेल्स, बेल्जियम – नाटो सम्मेलन के दौरान विश्वभर की नज़रें संयुक्त राज्य अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर थीं, जिन्होंने अपने कड़क रवैये और सहयोगी देशों के प्रति कड़ी टिप्पणियों से सबका ध्यान आकर्षित किया। हालांकि, इसी दौरान नाटो के सदस्य देश धीरे-धीरे यूरोप के अधिक रक्षा दायित्व स्वीकार करने की दिशा में ठोस कदम उठा रहे थे।
ट्रम्प ने सहयोगी देशों पर बजट बढ़ाने और वफादारी दिखाने का दबाव बनाया। उनकी यह मांग और कई बार की आलोचनाओं ने बैठक में माहौल तनावपूर्ण कर दिया। इस बीच, यूरोपीय सदस्य देश, विशेष रूप से जर्मनी, फ्रांस और अन्य पश्चिमी देश, सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए अपने-अपने हिस्से की जिम्मेदारियां बढ़ाने पर सहमत हुए।
नाटो के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “राजनीतिक बयानबाजी के बीच, हमारे सदस्य देश अपनी सामूहिक रक्षा को मजबूत करने के लिए गंभीर निर्णय ले रहे हैं। यह एक बड़ा बदलाव है, क्योंकि लंबे समय तक यूरोप ने अमेरिकी सुरक्षा सहायता पर निर्भरता बनाए रखी थी।”
यूरोप के रक्षा खर्च में बढ़ोतरी से यह संकेत मिलता है कि वे अब स्वयं की सुरक्षा व रक्षा तंत्र को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इसके पीछे रूस के बढ़ते प्रभाव और वैश्विक सुरक्षा चुनौतियां एक बड़ा कारण हैं।
हालांकि ट्रंप के वक्तव्य अक्सर तीखे और विवादास्पद रहे, नाटो के भीतर सहयोग और समन्वय की भावना बरकरार है। इस सम्मेलन ने यह भी स्पष्ट किया कि यूरोप और अमेरिका के बीच रणनीतिक साझेदारी आवश्यक बनी रहेगी, चाहे व्यक्तिगत राष्ट्राध्यक्षों के अलग-अलग रवैये क्यों न हों।
विश्लेषकों का मानना है कि यूरोप की बढ़ती रक्षा भूमिका से नाटो का संतुलन और अधिक विश्वसनीय होगा, और भविष्य में यह गठबंधन अधिक स्वायत्त निर्णय लेने में सक्षम होगा। इस प्रकार, नाटो सम्मेलन ने ट्रंप की आलोचनाओं के बावजूद एक नई दिशा और मजबूती का संकेत दिया है।



