एमटी सेट्टेबेलो पर भारतीय नौसैनिकों के तीन सदस्यों की मौत की पुष्टि: सोनोवाल

नई दिल्ली, भारत – भारत और अंतरराष्ट्रीय समुद्री समुदाय के लिए एक दुखद समाचार है। ओमान के तट के पास अमेरिकी सैन्य हमले के बाद एमटी सेट्टेबेलो नामक वाणिज्यिक जहाज पर सफर कर रहे तीन भारतीय नौसैनिकों की मौत की पुष्टि हो गई है। केंद्रीय शिपिंग मंत्री सरबनंद सोनोवाल ने गुरुवार को यह जानकारी दी।
सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से मिली इस जानकारी में मंत्री ने बताया कि पहले तीन भारतीय सदस्य लापता बताए गए थे, लेकिन अब उनकी लाशें बरामद और पहचानी जा चुकी हैं। सोनवाल ने इसे हमारे समुद्री परिवार के लिए एक गहरा नुकसान बताया। उन्होंने परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि मोदी सरकार इस कठिन समय में पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी है और उन्हें हर संभव सहायता प्रदान करेगी।
शिपिंग मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि बचाए गए चालक दल के सदस्यों को तुरंत देश वापस भेजा जाए और मृतक नौसैनिकों के अंतिम संस्कार के लिए उनके शव जल्द से जल्द परिजनों को सौंपे जाएं।
घटना के संदर्भ में, भारत ने बुधवार को ओमान के तट के पास वाणिज्यिक जहाज पर अमेरिका के सैन्य हमले के विरोध में अमेरिकी चार्ज डीअफेर को तलब कर कड़ा विरोध जताया था। इस हमले में 24 भारतीय चालक दल के सदस्यों में से तीन लापता बताए गए थे।
अमेरिका के सेंट्रल कमांड ने हमला स्वीकार करते हुए कहा कि जहाज ने अमेरिकी पोर्टों की नाकेबंदी के दौरान ईरान से तेल ले जाने का प्रयास किया, जिसके कारण इस पर हमला किया गया। बयान में कहा गया, “अमेरिकी ताकतों के निर्देशों का पालन न करने पर एमटी सेट्टेबेलो के इंजन कक्ष पर लक्षित हमले किए गए।”
भारत सरकार ने इस हमले की निंदा की है और इसे वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा के लिए खतरा बताया। विदेश मंत्रालय ने कहा कि 24 में से 21 भारतीयों को बचाया गया है तथा तीन अभी भी लापता हैं।
यह घटना ईरान और इज़राइल के बीच तनाव के बीच आई है, जिसमें दोनों देशों ने एक-दूसरे पर मिसाइल हमले किए थे। इससे क्षेत्रीय सुरक्षा की स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है।
केंद्रीय शिपिंग मंत्री सरबनंद सोनोवाल ने राज्य सरकारों, राजनयिक समुदाय और समुद्री एजेंसियों के सहयोग से प्रभावित परिवारों तक सहायता पहुंचाने का आदेश दिया है। भारत सरकार फिलहाल इस मामले पर पूरी तरह से नजर रखे हुए है और प्रभावित परिवारों के साथ लगातार संपर्क में है।
इस दुखद घटना ने समुद्री सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और क्षेत्रीय तनाव के मुद्दों पर गहराई से विचार करने का अवसर दिया है। सरकार का प्रयास है कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जाए और भारतीय नौसेना तथा वाणिज्यिक दल के सदस्यों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
समुद्री व्यापार और नौसैनिक सुरक्षा के लिए यह एक चुनौतीपूर्ण समय है, लेकिन भारत इस तरह की मुश्किलों का सामना दृढ़ता से करता रहेगा।



