Jammu and Kashmir

पीएम मोदी ने मुहर्रम के अवसर पर हजरत इमाम हुसैन के बलिदान को याद किया

नई दिल्ली, भारत। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को मुहर्रम के मौके पर हजरत इमाम हुसैन के बलिदान को याद करते हुए कहा कि उनका यह बलिदान सत्य और न्याय की राह में दृढ़ बने रहने की प्रेरणा देता है।

प्रधानमंत्री ने मुहर्रम के पर्व पर एक संदेश जारी करते हुए कहा, “हजरत इमाम हुसैन (अ.स) का बलिदान समाज के लिए साहस और दृढ़ विश्वास की अमिट शक्ति का उदाहरण है। यह संदेश आज भी लाखों लोगों को सच्चाई और न्याय की राह में अडिग रहने की ताकत देता है।”

हजरत इमाम हुसैन यजीद की तानाशाही शक्तियों के खिलाफ खड़े होकर न्याय और इंसाफ के लिए शहीद हुए थे। उनकी शहादत कारबला के युद्ध में हुई थी, जो इस्लामिक इतिहास का एक महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक अध्याय है।

मुहर्रम का महीना शिया समुदाय द्वारा विशेष श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। यह महीना हजरत इमाम हुसैन की याद में उनका सम्मान करने एवं उनके आदर्शों को जीवित रखने का अवसर होता है। इस अवसर पर देश भर में विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम और जुलूस निकाले जाते हैं, जिनमें लोग शहीद की वीरता और बलिदान को याद करते हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में यह भी कहा कि हजरत इमाम हुसैन का बलिदान केवल धार्मिक सीमाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरी मानवता के लिए एक मिसाल है। उन्होंने कहा, “उनका बलिदान हमें निरंतर याद दिलाता है कि सच्चाई और न्याय के लिए लड़ना कितना आवश्यक है।”

मुहर्रम के दौरान, शिया समुदाय के साथ-साथ देश के अन्य लोगों ने भी साहित्य, धर्मसभा, और बातचीत के माध्यम से आपसी भाईचारे और सहिष्णुता को बढ़ावा दिया। प्रधानमंत्री के इस उद्घोष ने एकता और सहअस्तित्व के संदेश को और मजबूती दी है।

भारत के विभिन्न हिस्सों में मुहर्रम को एक शांतिपूर्ण और समरसता भरे माहौल में मनाया जाता है। इस मौके पर सरकार और स्थानीय प्रशासन द्वारा सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जाते हैं ताकि सभी श्रद्धालु सुरक्षित रूप से अपनी धार्मिक परंपराओं का पालन कर सकें।

इस प्रकार, हजरत इमाम हुसैन का बलिदान आज दिन तक सत्य, न्याय और साहस का प्रतीक बना हुआ है, जो सामाजिक न्याय के लिए एक अमूल्य मार्गदर्शन प्रदान करता है।

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