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जयराम रमेश ने भूपेंद्र यादव के सहयोगियों के हटाए जाने को लेकर लगाया बड़ा घोटाले का आरोप

नई दिल्ली, भारत

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव के चार सहयोगियों को अचानक पद से हटाए जाने को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए इसे ‘‘बहुत बड़ा घोटाला’’ बताया है। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने इस मामले को लेकर केंद्र सरकार की नीति और कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं।

जयराम रमेश ने कहा कि जून, 2025 से ही केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय और राजस्थान सरकार द्वारा अलवर के निकट सरिस्का के ‘क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट’ की सीमा पुनर्निर्धारित करने के प्रयास जारी थे। यह कदम 50 से अधिक खनन कंपनियों को पुनः संचालन की अनुमति देने की दिशा में था, जबकि पहले इनकी गतिविधियां बंद कर दी गई थीं।

रमेश ने यह भी बताया कि 20 सितंबर, 2025 को भारतीय वन सर्वेक्षण (एफएसआई) ने पर्यावरण मंत्रालय को अपने पत्र में अरावली पर्वतमाला की परिभाषा में बदलाव के प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया था। एफएसआई ने कहा था कि इस बदलाव से खनन एवं रियल एस्टेट विकास को बढ़ावा मिलेगा, जो पर्यावरण के लिए खतरनाक होगा।

उन्होंने आगे बताया कि उच्चतम न्यायालय द्वारा गठित उच्च अधिकार प्राप्त समिति और न्यायालय के न्याय मित्र ने भी एफएसआई के रुख का समर्थन किया। इसके बावजूद मंत्रालय ने पुनर्परिभाषा का समर्थन किया और अनुमति दे दी।

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा, “केंद्रीय पर्यावरण मंत्री के चार करीबी सहयोगियों को अचानक हटाने की यह घटना एक बड़े घोटाले की तरफ इशारा करती है। यह कार्रवाई शीर्ष स्तर पर जांच तथा जवाबदेही की कमी को दर्शाती है।”

पर्यावरण मंत्रालय ने एक साथ एक निजी सचिव और दो अतिरिक्त निजी सचिवों को पद से हटाया है। मंत्री भूपेंद्र यादव के निजी सचिव को प्रशासनिक आधार पर हटाया गया है, जबकि एक अतिरिक्त निजी सचिव की सेवा समाप्त कर दी गई और दूसरे को उनके मूल कैडर में समय से पहले वापस भेज दिया गया।

इस मामले में कांग्रेस ने सरकार की पारदर्शिता की मांग की है और आरोप लगाया है कि पर्यावरण संरक्षण के नाम पर हो रही इस अवैध अनुमति से प्राकृतिक संसाधनों को भारी नुकसान होगा। कांग्रेस का कहना है कि यह मामला न्यायालय और सरकार दोनों के समक्ष गंभीर रूप से उठाया जाना चाहिए।

केंद्र सरकार की इस कार्रवाई से पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। सरिस्का टाइगर रिजर्व जैसी संवेदनशील जगह के प्रति इस प्रकार का रवैया वन्यजीवों और इकोसिस्टम के लिए खतरा बना हुआ है।

पीटीआई के इनपुट के साथ

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