डिग्री लेकर IIT कानपुर के 3,104 विद्यार्थियों ने प्रारंभ किया नया सफर

कानपुर, उत्तर प्रदेश। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर का 59वां दीक्षांत समारोह हाल ही में बड़े उत्साह और सम्मान के बीच संपन्न हुआ। इस समारोह में कुल 3,104 विद्यार्थियों को विभिन्न पाठ्यक्रमों की डिग्रियां प्रदान की गईं, जिनमें स्नातक, स्नातकोत्तर और ई-मास्टर्स आउटरीच कार्यक्रम के विद्यार्थी शामिल थे। संस्थान ने न केवल डिग्रियां सौंपीं, बल्कि शैक्षणिक उत्कृष्टता के लिए पदक और पुरस्कार भी वितरित किए।
दीक्षांत समारोह दो सत्रों में आयोजित किया गया। पहले सत्र में मुख्य सभागार में राष्ट्रपति स्वर्ण पदक, निदेशक स्वर्ण पदक सहित अन्य प्रतिष्ठित पुरस्कार प्रदान किए गए। दूसरे सत्र में विद्यार्थियों को औपचारिक रूप से लेक्चर हॉल में अपनी डिग्रियां सौंपी गई। इस आयोजन का नेतृत्व सीनेट पोस्ट ग्रेजुएट समिति और अंडर ग्रेजुएट समिति के अध्यक्षों ने संभाला। समारोह के मुख्य अतिथि भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र (IN-SPACe) के अध्यक्ष और आईआईटी कानपुर के पूर्व छात्र डॉ. पवन गोयनका थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के कार्यवाहक अध्यक्ष जयंत पाटिल ने की, जबकि संस्थान के निदेशक प्रो. मनीन्द्र अग्रवाल भी उपस्थित थे।
मुख्य अतिथि डॉ. पवन गोयनका ने विद्यार्थियों को प्रेरक भाषण देते हुए बताया कि जीवन 100 मीटर की दौड़ नहीं है, बल्कि एक लंबी इंजीनियरिंग परियोजना की तरह है। उन्होंने कहा कि असफलताओं से सीखकर निरंतर आगे बढ़ना ही सफलता की कुंजी है। उन्होंने विद्यार्थियों से बड़े सपने देखने, हार न मानने और सतत सीखने का संदेश दिया। वहीं, जयंत पाटिल ने कहा कि डिग्री केवल एक उपलब्धि नहीं, बल्कि जीवन की नई शुरुआत है। उन्होंने विद्यार्थियों से समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने और नवाचार की भावना बनाए रखने का आग्रह किया। निदेशक प्रो. मनीन्द्र अग्रवाल ने तकनीकी ज्ञान के साथ नैतिक मूल्यों और सही प्रश्न पूछने की महत्ता पर बल दिया।
इस वर्ष 390 पीएचडी, 53 एमटेक-पीएचडी, 502 एमटेक, 852 बीटेक सहित विभिन्न अनेक पाठ्यक्रमों के विद्यार्थियों ने अपनी योग्यता हासिल की। राष्ट्रपति स्वर्ण पदक सागर के. वी. (कम्प्यूटर साइंस एवं इंजीनियरिंग) को प्रदान किया गया, जबकि निदेशक स्वर्ण पदक आदित्य वी. (स्टैटिस्टिक्स एंड डेटा साइंस) और ऋत्विक शंकर (एयरोस्पेस इंजीनियरिंग) को सम्मानित किया गया। अन्य पुरस्कारों में रतन स्वरूप स्मृति पुरस्कार भी शामिल था।
दीक्षांत समारोह में विद्यार्थियों ने संस्थान की परंपरा का पालन करते हुए निर्धारित परिधान पहनकर शिष्टाचार का परिचय दिया। डिग्री प्राप्त कर वे IIT कानपुर की प्रतिष्ठित शैक्षणिक विरासत तथा ज्ञान, नेतृत्व और समाज के प्रति उत्तरदायित्व को अंगीकार करते हुए अपने उज्ज्वल भविष्य की ओर बढ़ेंगे। यह महत्वपूर्ण घटना न केवल उनकी व्यक्तिगत सफलता को दर्शाती है, बल्कि भारत की तकनीकी प्रगति में उनकी भूमिका का भी परिचायक है।




