चारा घोटाला केस में लालू यादव को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, CBI की जमानत रद्द करने की मांग खारिज

नई दिल्ली, भारत। राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव को देवघर चारा घोटाला मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें झारखंड हाईकोर्ट द्वारा दी गई जमानत को रद्द करने की मांग की गई थी। कोर्ट ने फिलहाल हाईकोर्ट के निर्णय में हस्तक्षेप नहीं किया और लंबित अपीलों के शीघ्र निपटारे के लिए भी निर्देश दिए।
सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश में दखल देने से इनकार किया
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि लालू यादव को जमानत मिले कई वर्ष हो चुके हैं तथा उनकी अपीलें लंबित हैं। ऐसे में जमानत रद्द करना उचित नहीं होगा। न्यायालय ने झारखंड हाईकोर्ट को आदेश दिया कि वह लंबित आपराधिक अपीलों की सुनवाई शीघ्र समाप्त करे ताकि मामले का निपटारा जल्द हो सके। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि फिलहाल जमानत आदेश पर रोक लगाने का कोई कारण नहीं है और इसलिए सीबीआई की अंतरिम याचिका को मंजूरी नहीं दी गई।
CBI ने फैसले पर उठाए सवाल
सुनवाई के क्रम में सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने तर्क दिया कि झारखंड हाईकोर्ट का आदेश तथ्यात्मक और कानूनी दृष्टि से त्रुटिपूर्ण है। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट ने मान लिया कि लालू यादव ने सजा का आधा हिस्सा पूरा कर लिया है, जबकि वास्तविक स्थिति इससे भिन्न है। CBI ने बताया कि लालू यादव को विभिन्न मामलों में अलग-अलग सजाएं मिली हैं, और दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 427 के अनुसार ये सजाएं एक के बाद एक पूरी करनी होती हैं, न कि एक साथ।
अलग-अलग सजाओं को लेकर कानूनी बहस
CBI का यह भी तर्क रहा कि ट्रायल कोर्ट ने विभिन्न मामलों की सजाओं को समवर्ती (Concurrent) मान लिया, जबकि कानून के अनुसार यदि सजाएं समवर्ती नहीं हैं तो उन्हें अनुक्रमिक रूप से भुगतना आवश्यक होता है। इसलिए आधी सजा पूरी होने के आधार पर जमानत देना सही निर्णय नहीं माना जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने अभी इन दलीलों पर अंतिम निर्णय देने से परहेज किया और कहा कि इन मुद्दों की विस्तृत सुनवाई अपील के दौरान होगी।
अपीलों की जल्द सुनवाई के निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड हाईकोर्ट को निर्देश दिया कि वह संबंधित अपीलों की सुनवाई में तेजी लाए एवं लंबित मामलों को प्राथमिकता दे। न्यायालय ने कहा कि इतने लंबे समय तक अपीलों का लंबित रहना न तो न्यायिक प्रक्रिया की भलाई में है और न ही जनता के विश्वास में। इसलिए शीघ्र अंतिम निर्णय जरूरी है।
स्वास्थ्य कारणों पर जमानत मिली थी
झारखंड हाईकोर्ट ने लालू प्रसाद यादव को उनकी खराब स्वास्थ्य स्थिति और अन्य परिस्थितियों को ध्यान में रखकर जमानत दी थी। CBI ने इस आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था और जमानत रद्द करने का अनुरोध किया था। अब सर्वोच्च अदालत के फैसले के बाद उनकी जमानत बरकरार रहेगी, जबकि मामले की अंतिम सुनवाई झारखंड हाईकोर्ट में जारी रहेगी।




