राम मंदिर चंदा चोरी मामले में दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग पर संतों का समर्थन, दत्तात्रेय होसबोले के बयान को बल

अयोध्या, उत्तर प्रदेश। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले द्वारा राम मंदिर चंदे से जुड़े कथित अनियमितता के मामले में दिए गए बयान का अयोध्या के कई संतों और धार्मिक नेताओं ने समर्थन किया है। संतों ने कहा कि यदि किसी प्रकार की गड़बड़ी पाई जाती है तो उसकी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। यह आवश्यक है कि राम जन्मभूमि आंदोलन और मंदिर की पवित्रता पर किसी भी तरह की आंच न आए।
राम जन्मभूमि ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष सत्येंद्र दास वेदांती ने इस मामले में कहा कि दत्तात्रेय होसबोले का बयान पूरी तरह जायज है। उन्होंने कहा कि राम मंदिर चंदे से जुड़ी कथित चोरी की घटनाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। देश-विदेश की नजरें इस आंदोलन और मंदिर की गतिविधियों पर बनी हुई हैं। जब भी इस प्रकार की घटनाएँ सामने आती हैं, तो यह मंदिर की गरिमा और राम जन्मभूमि आंदोलन की छवि को प्रभावित करती हैं। इसलिए दोषी पाए जाने पर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई अवश्य होनी चाहिए। सत्येंद्र दास वेदांती ने स्पष्ट किया कि वे दत्तात्रेय होसबोले के बयान का पूर्ण समर्थन करते हैं।
पंडित कल्कि राम ने भी इस बयान की पुष्टि की और कहा कि वे इससे सहमत हैं। उन्होंने बताया कि इस विषय पर वे स्वयं काफी पहले से आवाज उठा रहे हैं। जिन्होंने राम मंदिर निर्माण का विरोध करना शुरू किया था, वे आज भी इस विरोध को जारी रखे हुए हैं। उन्होंने कहा कि प्राण-प्रतिष्ठा समारोह के दौरान पूरी दुनिया ने सनातन धर्म के अनुयायियों की एकजुटता देखी थी और इस एकता को कायम रखना अति आवश्यक है। पंडित कल्कि राम ने लोगों से आग्रह किया कि वे किसी भी भ्रम में न पड़ें क्योंकि कुछ लोग राम मंदिर की छवि खराब करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसे लोग इस्लामिक एजेंडा के तहत सनातन समाज को बांटने का प्रयास भी कर सकते हैं।
अयोध्याधाम स्थित साकेत भवन मंदिर के महंत सीताराम दास महाराज ने भी दत्तात्रेय होसबोले के बयान को सही ठहराया। उन्होंने बताया कि हिंदू समाज की प्रकृति सहनशील, सरल और उदार है। हिंदू समाज दयालुता और प्यार का संदेश देता है, जो कि न किसी पर हमला करता है और न ही अन्याय करता है। महंत सीताराम दास ने हिंदू संस्कृति की ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ की भावना को उजागर करते हुए कहा कि यह समाज सभी को एक परिवार की तरह समझता है और समरसता के साथ सभी का कल्याण चाहता है। उनका कहना था कि यह हिन्दू समाज का मूल स्वभाव है कि सभी की भलाई और शांति के लिए कार्य करना।
संतों और धार्मिक नेताओं के इस समर्थन से यह स्पष्ट हो गया है कि राम मंदिर चंदा मामले में गड़बड़ी की जांच और दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की मांग व्यापक स्तर पर स्वीकृत है। इससे राम जन्मभूमि आंदोलन की स्थिरता और मंदिर की गरिमा बनी रहने की उम्मीद है।




