Uttar Pradesh

अयोध्या में कांग्रेस नेताओं की नजरबंदी पर सियासत गर्माई, पार्टी ने भाजपा सरकार पर जताई चिंता

अयोध्या, उत्तर प्रदेश। राम मंदिर दर्शन को लेकर अयोध्या पहुँचे कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं को नजरबंद किए जाने की घटना ने प्रदेश की सियासत को गर्मी से भर दिया है। कांग्रेस नेताओं ने योगी आदित्यनाथ सरकार और भाजपा पर कड़े आरोप लगाते हुए इस नजरबंदी को लोकतंत्र और संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन बताया है।

कांग्रेस सांसद किशोरी लाल शर्मा ने कहा कि उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने पूर्व में ही सूचना दे रखी थी कि कांग्रेस का एक प्रतिनिधिमंडल राम मंदिर में दर्शन के लिए अयोध्या जाएगा। कांग्रेस के अनुसार, यह कोई विवादित या असामान्य प्रयास नहीं था। उन्होंने यह भी बताया कि अमेठी और रायबरेली के कई कांग्रेस नेताओं ने सवाल किया था कि क्या वे भी इस यात्रा में शामिल हो सकते हैं। किशोरी लाल ने बताया, “मैंने कहा था कि कोई इस यात्रा को रोक नहीं सकता, लेकिन फिर भी अमेठी के सभी कांग्रेस कार्यकर्ताओं को अपने घरों में नजरबंद कर दिया गया। यह स्पष्ट तौर पर एक सियासी रोकथाम थी।”

राम मंदिर से संबंधित मामलों पर बिज्ञ सांसद किशोरी लाल शर्मा ने शंकराचार्यों और संतों को शामिल करते हुए एक व्यापक समिति बनाने का सुझाव दिया, ताकि धार्मिक मामलों पर पारदर्शी एवं जनता की सहमति से निर्णय लिए जा सकें।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राजेश ठाकुर ने राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर चिंता जताते हुए कहा कि जिस तरह चोरी और सीनाजोरी हो रही है, उसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कांग्रेस नेताओं ने भगवान राम के दरवाजे पर जाकर ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की, लेकिन उनकी नजरबंदी से साफ हुआ कि दोषियों को बचाने की कोशिश अधिक और पकड़ने की कोशिश कम हो रही है। ठोकर ने कहा, “हाउस अरेस्ट का मतलब है कि चोर चोरी के डर से घबराया हुआ है। राहुल गांधी द्वारा कहा गया ‘चौकीदार ही चोर है’ आज की इस घटना से सच साबित हो रहा है।”

उत्तर प्रदेश कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने कहा कि योगी सरकार डरी हुई है और उनके आत्मविश्वास में कमी आई है। उन्होंने कहा, “जब अरविंद केजरीवाल को अयोध्या में सुरक्षा मिली थी, तो कांग्रेस के 9 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को रामलला दर्शन के दौरान नजरबंद क्यों किया गया? यह दर्शाता है कि सरकार डर की स्थिति में है और सत्ता के नुकसान का भय सताता है।”

इस पूरे मामले ने राजनीतिक दलों के बीच विवाद को और गहरा कर दिया है। कांग्रेस ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला करार देते हुए योगी सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा है। वहीं, भाजपा की ओर से अभी इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी नहीं की गई है।

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