मिजोरम शांति समझौते को 40 वर्ष पूरे, जयराम रमेश ने राजीव गांधी को याद किया, कहा वे थे ‘असाधारण राजनेता’

इम्फाल, मिजोरम। मिजोरम शांति समझौते के 40 साल पूरे होने पर कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने मंगलवार को अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी को याद करते हुए उन्हें ‘असाधारण राजनेता’ बताया। 30 जून, 1986 को हुए इस ऐतिहासिक समझौते ने वर्षों तक चले उग्रवाद एवं हिंसा का सफलतापूर्वक अंत किया था, जिसे मिजोरम के इतिहास में एक परिवर्तनकारी घटना माना जाता है।
जयराम रमेश ने अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा कि मिजोरम शांति समझौते के 40 वर्ष पूरे होने पर इस अवसर को याद करते हुए यह स्पष्ट हो जाता है कि यह एक लंबी एवं कठिन लड़ाई के बाद मिला परिणाम था। उन्होंने बताया कि समझौता केन्द्र सरकार और पु लालडेंगा के नेतृत्व वाले मिजो नेशनल फ्रंट के बीच लगभग डेढ़ दशक तक चली बातचीत का नतीजा था।
रमेश ने आगे कहा कि दो महीने बाद ही तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने लाल थानहावला से मुख्यमंत्री पद छोड़ने का आग्रह किया ताकि मिजोरम के नए नेतृत्व में लालडेंगा को मुख्यमंत्री बनाया जा सके। यह कदम राज्य के विकास और स्थिरता के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ था।
मिजोरम में हर साल 30 जून को ‘रेमना नी’ के रूप में शांति दिवस मनाया जाता है, जो इस समझौते की याद में आयोजित किया जाता है। इस दिन को विशेष रूप से राज्य के लोगों और सरकार द्वारा सम्मानित किया जाता है क्योंकि इसी समझौते ने क्षेत्र में स्थायी शांति और समृद्धि की नींव रखी।
राज्य सरकार ने इस 40वीं वर्षगांठ को विशेष रूप से मनाने के लिए कई कार्यक्रम आयोजित किए हैं जिनमें सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ, सेमिनार, एवं सार्वजनिक रैलियाँ शामिल हैं, जिनका उद्देश्य लोगों को शांति और एकता की भावना से जोड़ना है।
यह शांति समझौता मिजोरम में दशकों से चले आ रहे संघर्ष को समाप्त कर एक नया युग लेकर आया। इसने न केवल राजनीतिक स्थिरता दी बल्कि सामाजिक एवं आर्थिक विकास के रास्ते भी खोल दिए। लोक स्तर पर संपन्न हुए वार्ताकारों और नेताओं के समर्पण और समझदारी की बदौलत यह सफल हुआ।
पच्छिम मिजोरम के एक दूरदराज क्षेत्र से निकला मिजो नेशनल फ्रंट लंबे समय से अपनी अलग पहचान और क्षेत्रीय हितों के लिए संघर्ष कर रहा था। इस संघर्ष को समाप्त करते हुए केंद्र व राज्य सरकार ने मिलकर एक स्थायी समाधान निकाला, जिसे आज भी पूरे देश में एक मिसाल के रूप में देखा जाता है।
मिजोरम के लोग आज शांति और विकास की ओर निरंतर बढ़ रहे हैं, और इस समझौते की विरासत उन्हें एकजुटता और उम्मीद की राह दिखाती है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश का यह संदेश स्थानीय लोगों एवं देशवासियों को याद दिलाता है कि साहस और नेतृत्व की कितनी अहम भूमिका होती है।
यह ऐतिहासिक मिजोरम शांति समझौता एक प्रेरणा है कि बातचीत और सहमति के माध्यम से कितनी बड़ी समस्याओं का समाधान निकाला जा सकता है, जो अन्य क्षेत्रीय संघर्षों के समाधान के लिए भी मार्ग प्रशस्त करता है।
पीटीआई के इनपुट के साथ




