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महिला आरक्षण बहाना, असली निशाना आरक्षण खत्म करना: जयराम रमेश का आरोप

नई दिल्ली, भारत

कांग्रेस ने बुधवार को नरेन्द्र मोदी सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि महिला आरक्षण के नाम पर दो-तिहाई बहुमत जुटाने की कोशिश दरअसल आरक्षण खत्म करने के उद्देश्य से की जा रही है। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने यह बात स्पष्ट की कि सरकार महिला आरक्षण लागू करना चाहती है तो इसे वर्तमान 543 लोकसभा सीटों में से एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित कर सकती है, जिससे परिसीमन या सीट संख्या बढ़ाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।

आरक्षण खत्म करने को लेकर सत्तापक्ष की योजना

जयराम रमेश ने मीडिया से बातचीत में कहा कि सरकार दो-तिहाई बहुमत पाने के लिए विपक्षी दलों को तोड़-फोड़ रही है ताकि संविधान में ऐसे बड़े संशोधन कर सकें जो आरक्षण व्यवस्था को समाप्त कर दें। उन्होंने कहा, “तत्काल लक्ष्य परिसीमन हो सकता है, लेकिन असली निशाना आरक्षण है। 2024 के चुनाव के बाद सामने आए घटनाक्रम इस आशंका को मजबूत करते हैं।”

उन्होंने आगे बताया कि आरक्षण प्रणाली स्वतंत्र भारत के शुरुआती वर्षों में पं. जवाहरलाल नेहरू और डॉ. भीमराव आंबेडकर के सामूहिक प्रयास से संविधान में शामिल की गई थी। हालांकि, जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने इससे विरोध किया था।

महिला आरक्षण पर विपक्ष की एकजुटता

जयराम रमेश ने भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारा को भी आरक्षण विरोधी बताया। कांग्रेस महासचिव ने यह साफ किया कि लोकसभा में हाल ही में पेश किए गए संविधान संशोधन विधेयक के खिलाफ वोटिंग में विपक्ष ने केवल परिसीमन की प्रक्रिया का विरोध किया था, महिला आरक्षण का नहीं। “महिला आरक्षण के खिलाफ कोई वोट नहीं हुआ,” उन्होंने कहा।

रमेश ने कांग्रेस के स्पष्ट रुख को दोहराया कि मौजूदा 543 सीटों में से एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होनी चाहिए और यह अगली लोकसभा चुनाव से लागू किया जाना चाहिए।

लोकसभा सीटों में वृद्धि पर कांग्रेस का रुख

जब पूछा गया कि यदि सरकार लोकसभा की सीटों की संख्या 50 प्रतिशत बढ़ाने का प्रस्ताव लाती है तो विपक्ष क्या करेगा, तो उन्होंने कहा कि विरोध केवल लेवी वृद्धि तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा कि 800 से अधिक सांसद होने पर संसद की कार्यप्रणाली प्रभावित होगी क्योंकि अभी भी कई सांसदों को बोलने का पर्याप्त मौका नहीं मिलता। इसके अलावा, उन्होंने राज्यसभा पर पड़ने वाले असर पर सरकार से स्पष्टता की मांग की।

जाति जनगणना में विलंब की संभावना

जाति जनगणना की बात करते हुए जयराम रमेश ने कहा कि सरकार तो इसकी घोषणा कर चुकी है, लेकिन परिसीमन और अन्य प्रक्रियाओं की जटिलताओं के कारण इसमें 5 से 10 साल तक देरी हो सकती है। उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह की इन प्रयासों के बावजूद लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत की संभावना को नकारा।

उन्होंने याद दिलाया कि इस साल अप्रैल में महिला आरक्षण और परिसीमन से संबंधित संविधान (131वां संशोधन) विधेयक लोकसभा में पेश किया गया था। हालांकि, आवश्यक दो-तिहाई बहुमत न मिलने के कारण यह विधेयक पारित नहीं हो सका। पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े थे।

कांग्रेस का मानना है कि सरकार की असली मंशा महिला आरक्षण नहीं बल्कि आरक्षण खत्म करना है, इसलिए जनता और सभी विपक्षी दलों का यह कर्तव्य है कि वे इस प्रयास को विफल करें और सामाजिक न्याय की रक्षा करें।

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