राम मंदिर ट्रस्ट में बड़ा बदलाव: कृष्ण मोहन बने कार्यवाहक महासचिव, चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे मंजूर

अयोध्या, उत्तर प्रदेश: राम मंदिर ट्रस्ट में चढ़ावा चोरी के मामले के बाद सोमवार को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की पहली अहम बैठक सम्पन्न हुई। करीब तीन घंटे तक चली इस बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए, जिनमें महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफे को मंजूरी देना सहित सेवानिवृत्त भारतीय वन सेवा अधिकारी कृष्ण मोहन को कार्यवाहक महासचिव के पद पर नियुक्त करना शामिल है।
ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी ने बैठक के बाद बताया कि चंपत राय ने स्वयं इस्तीफा दिया था क्योंकि उन्होंने कहा कि जब तक जिम्मेदार लोगों की पहचान और कार्रवाई पूरी नहीं होती, तब तक पद पर बने रहना उचित नहीं होगा। उन्होंने इस घटना को बेहद दुखद और ट्रस्ट के लिए शर्मनाक बताया। वरिष्ठ विधिवेत्ता और ट्रस्टी के. पाराशरन ने कहा कि ट्रस्ट के संविधान के अनुसार पदाधिकारी के इस्तीफे को स्वीकार करना आवश्यक होता है। इस आधार पर चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार कर लिए गए हैं।
महासचिव पद की जिम्मेदारी अब सेवानिवृत्त आईएफएस अधिकारी कृष्ण मोहन को सौंपी गई है। पदभार संभालने के बाद कृष्ण मोहन ने कहा कि चढ़ावा चोरी की घटना में शामिल किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा और मंदिर प्रबंधन की कमियों को दूर करना उनकी प्राथमिकता होगी। उन्होंने कहा कि इससे श्रद्धालुओं के मन में जो अविश्वास पैदा हुआ है, उसे खत्म करना ट्रस्ट की प्रमुख जिम्मेदारी है। उन्होंने मंदिर में दान और चढ़ावे की सुरक्षा के लिए पारदर्शी और आधुनिक व्यवस्था लागू करने का भरोसा दिलाया।
बैठक में मीडिया और सोशल मीडिया पर प्रसारित कुछ अफवाहों का भी खंडन किया गया। ट्रस्ट ने कहा कि मंदिर से अन्य कीमती वस्तुओं के गायब होने की खबरें भ्रामक हैं और श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे अपुष्ट सूचनाओं पर विश्वास न करें।
भविष्य में वित्तीय और प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ाने के लिए ट्रस्ट ने एक नई समिति गठित करने का निर्णय लिया है, जो दान प्रबंधन और सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने के सुझाव देगी। ट्रस्ट की अगली बैठक 22 जुलाई को होगी जिसमें SIT की जांच रिपोर्ट की समीक्षा, नए पदाधिकारियों की नियुक्ति और अन्य प्रशासनिक विषयों पर चर्चा होगी।
ट्रस्ट ने अपनी वित्तीय स्थिति से जुड़ी भी कुछ प्रमुख जानकारी सार्वजनिक की। उन्होंने बताया कि स्थापना से अब तक श्रद्धालुओं से 3,264 करोड़ रुपये प्राप्त हुए जिन्हें मंदिर निर्माण और अन्य कार्यों पर खर्च किया गया। 31 मार्च 2026 तक चढ़ावे के रूप में 582 करोड़ रुपये मिले, जिनमें से अधिकांश का उपयोग संचालन और संबंधित कार्यों में किया गया और शेष धन बैंक खातों में सुरक्षित रखा गया है।
ट्रस्ट ने यह भी बताया कि नकद दानों के अलावा अब तक 2,926 भेंटें श्रद्धालुओं ने मंदिर को अर्पित की हैं जिनका रिकॉर्ड विधिवत रखरखाव किया जाता है। प्रत्येक वर्ष एक स्वतंत्र चार्टर्ड अकाउंटेंसी फर्म इन भेंटों का भौतिक सत्यापन करती है। श्रद्धालु अगर अपनी दान गई भेंटों की जानकारी चाहते हैं तो वे ट्रस्ट कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं।
चढ़ावा चोरी की घटना के बाद सबसे बड़ी चुनौती श्रद्धालुओं का विश्वास पुनः प्राप्त करना है। नए कार्यवाहक महासचिव कृष्ण मोहन ने यह स्पष्ट किया कि पारदर्शिता, जवाबदेही और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। ट्रस्ट ने पुनः विश्वास दिलाया कि SIT की जांच निष्पक्ष तरीके से चलती रहेगी और दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस घटना से मिली सीख के आधार पर ट्रस्ट ने भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कड़े प्रबंधन उपाय करने का संकल्प लिया है।




