Uttar Pradesh

राम मंदिर चढ़ावा मामले पर ओवैसी का भाजपा पर निशाना, बोले- ‘अगर ट्रस्ट में मुस्लिम सदस्य होता तो एनकाउंटर हो जाता’

बिजनौर, उत्तर प्रदेश। राम मंदिर चढ़ावा और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों को लेकर राजनीति गरमाई हुई है। एआईएमआईएम के प्रमुख और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने बिजनौर में आयोजित जनसभा में भाजपा, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट पर कड़ी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि अगर ट्रस्ट में कोई मुस्लिम सदस्य होता और उसपर वित्तीय अनियमितता का आरोप लगता तो उसके साथ सख्त कार्रवाई होती, यहां तक कि एनकाउंटर जैसी कार्रवाई भी की जाती।

ओवैसी ने कहा कि यह भेदभाव कानून के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है और सभी के साथ समान व्यवहार होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी मामले में कार्रवाई राजनीतिक या धार्मिक आधार पर नहीं, बल्कि तथ्य और कानून के आधार पर होनी चाहिए।

चंपत राय को लेकर लगाए सवाल

जनसभा में उन्होंने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय का भी नाम लिया और कहा कि उन्हें भी इस मामले में जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। ओवैसी ने कहा कि गिरफ्तारी तो हुई है लेकिन मामले के सभी पहलुओं की जांच अभी बाकी है और सही निष्कर्ष पर पहुंचना न्यायिक प्रक्रिया की ज़रूरत है।

भाजपा और आरएसएस पर कड़ी टिप्पणी

ओवैसी ने भाजपा और आरएसएस पर भी निशाने साधते हुए कहा कि अक्सर विपक्षी नेताओं और अल्पसंख्यकों पर कठोर कार्रवाई की जाती है, लेकिन इसी तरह के अन्य मामलों में दोगले रवैये का सामना करना पड़ता है। उन्होंने केंद्र सरकार से राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति के मामलें में स्पष्टता की मांग की।

कांग्रेस ने भी उठाए पारदर्शिता के सवाल

इसी बीच कांग्रेस ने भी इस मामले में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने ट्रस्ट गठन की प्रक्रिया में पारदर्शिता के अभाव को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की। वहीं, उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय के अयोध्या दौरे को भी राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

मामले की प्रगति

राम मंदिर चढ़ावा दुरुपयोग के आरोपों की जांच विशेष जांच दल (एसआईटी) कर रहा है। 25 जून को प्राथमिकी दर्ज की गई थी और अब तक आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जांच अभी जारी है और वित्तीय लेनदेन समेत मामले के हर पहलू को बारीकी से परखा जा रहा है।

फिलहाल दोषी या निर्दोष का निर्णय जांच पूरी होने के बाद ही होगा और न्यायिक प्रक्रिया के तहत ही मामले का समाधान निकलेगा।

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