लखनऊ अग्निकांड: हादसे में मारे गए लोगों की सूची जारी, दो गंभीर रूप से घायल

लखनऊ, उत्तर प्रदेश। सोमवार को लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र के पुरनिया इलाके में भीषण आग लगने की घटना ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है। इस दर्दनाक हादसे में 15 लोगों की मौत हो गई जबकि दो गंभीर रूप से घायल हो चुके हैं और उनका इलाज केजीएमयू में चल रहा है।
आग लगने की घटना ने स्थानीय प्रशासन और सरकार की भी कई संवेदनशील समस्याओं को सामने ला दिया है, खासकर सुरक्षा व्यवस्था और भवन संरचना के मानकों को लेकर। इस आग में जान गंवाने वालों में लखनऊ के जानकीपुरम, गुडंबा, आलमबाग, सीतापुर, हजरतगंज, कानपुर नगर, चिनहट, शहादतगंज, न्यू अलीपुर, बाराबंकी, उतरेठिया एवं दक्षिणी 24 परगना बंगाल शामिल हैं।
मृतकों के नाम इस प्रकार हैं: शाहजान, सुखमनी सिंह, आदित्य श्रीवास्तव, ज्वानिल चक्रवर्ती, सागर पंत, नीलेश, सय्यम, भविष्य, ज्योति, अब्दुल रहमान, अनामिका सामंत, मो. अम्मार, अनुच्छा और सोमाल्या। घायल लवप्रीत और जयंत गंभीर चोटों के साथ केजीएमयू में उपचाराधीन हैं।
हादसे के बाद सरकार ने तुरंत कार्रवाई करते हुए इस मामले में भारी छानबीन शुरू की है। इसके तहत आग लगने के पीछे की वजहों की जांच शुरू कर दी गई है। आग लगने के संबंध में भवन के मालिक समेत चार नामजद और अज्ञात अन्य लोगों के खिलाफ आईपीसी की धारा 105, 110, 125 के साथ ही बीएनएस की 3(5) की भी धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है।
प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ भी सख्त कदम उठाए हैं। चार अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है जबकि तीन अभियुक्तों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। निलंबित अधिकारियों में गौरव कुमार (एक्सईएन कलेक्शन जानकीपुरम), कमलेन्द्र कुमार सिंह (एफएसएसओ इंदिरा नगर), अनिल कुमार (सहायक अभियंता) और प्रमोद पांडे (जूनियर इंजीनियर) शामिल हैं।
शीघ्र कार्रवाई के निर्देश मुख्यमंत्री द्वारा दिए जाने के बाद यह कदम उठाए गए हैं ताकि घटनाओं दोबारा पुनरावृत्ति न हो सके। गिरफ्तार आरोपियों में रामकृष्ण उपाध्याय, वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला और तुषॉक कृष्णा जायसवाल हैं।
स्थानीय प्रशासन ने आग लगने की असल वजहों एवं लापरवाही की जांच के लिए विशेष टीम गठित की है। साथ ही प्रभावित परिवारों को तत्काल मदद देने एवं राहत कार्यों को तेजी से अंजाम देने की प्रक्रिया जारी है।
यह दुर्घटना सुरक्षा व्यवस्था और भवन निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठाती है और ऐसे हादसों से बचने के लिए बेहतर योजना और निगरानी की आवश्यकता पर बल देती है। प्रभावित परिवारों को नैतिक और वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए प्रशासन तत्पर है।


