सपा सांसद का विवादित बयान, बोले- बहुसंख्यक जनता बहुसंख्यक ज़हरीली हो गई

मुरादाबाद, उत्तर प्रदेश। समाजवादी पार्टी के राज्यसभा सांसद जावेद अली ने हाल ही में विवादित बयान दिया है, जिसमें उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को देश में जहर फैलाने का आरोप लगाते हुए बहुसंख्यक आबादी को जहरीला बताया। इस बयान ने राजनीतिक व सामाजिक क्षेत्रों में नई बहस छेड़ दी है।
राज्यसभा सांसद जावेद अली को एक वायरल वीडियो में यह कहते सुना गया कि मुरादाबाद और संभल जैसे इलाकों में ज्यादातर लोग समाजवादी पार्टी के समर्थक हैं और लंबे समय से इस पार्टी के साथ जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा, “मैं मुरादाबाद या संभल जैसे क्षेत्रों में बात करता हूं तो लोगों को ज्यादा समझाने की जरूरत नहीं पड़ती है, क्योंकि यहां ज्यादातर वो लोग होते हैं, जो एक लंबे अरसे से समाजवादी पार्टी के समर्थक और ताकत रहे हैं। ये लोग मुलायम सिंह यादव के जमाने से साथ देते रहे हैं। इसलिए लोगों को बहुत कुछ समझाना नहीं पड़ता है।”
उन्होंने अपने बयान में यह भी कहा, “जहां अल्पसंख्यकों की आबादी कम है और बहुसंख्यक अधिक, वहां भाजपा द्वारा फैलाया गया जहर अब बहुसंख्यक जनता में भी नजर आने लगा है और यह काफी हद तक जहरीला हो गया है।”
सपा सांसद ने आगे कहा कि भाजपा के कारण एक ऐसा माहौल बन गया है, जिसमें उत्तर प्रदेश और पूरे देश में आपसी विश्वास कम हो गया है। “मैं आरोप नहीं लगा रहा हूं, लेकिन भाजपा ने ऐसा माहौल पैदा कर दिया है कि आज उत्तर प्रदेश और देश के अंदर आपस में, जो कभी एक-दूसरे पर विश्वास होता था, उसमें धर्म के आधार पर काफी कमी आई है और वह विश्वास टूटा है।” उन्होंने अपनी बात स्पष्ट करते हुए इस स्थिति पर चिंता जाहिर की।
जानकारी के अनुसार, जावेद अली रविवार को मुरादाबाद में सपा के पीडीए सम्मेलन में भाग ले रहे थे, जहां उन्होंने ये विवादास्पद टिप्पणी की। कार्यक्रम में उनका भाषण सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना।
जावेद अली उत्तर प्रदेश के संभल जिले के मिर्जापुर नसरुल्लापुर के निवासी हैं और पहले भी सपा सरकार के दौरान राज्यसभा सदस्य रह चुके हैं। उनका मुरादाबाद जिले में भी गहरा राजनीतिक प्रभाव माना जाता है। उनके इस बयान से प्रदेश की सियासत में नए विवादों की संभावना जताई जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सांसद के इस तरह के बयान समाज में विभाजन और अविश्वास को बढ़ावा दे सकते हैं, इसलिए राजनेताओं को इस प्रकार के संवेदनशील मुद्दों पर सतर्क और जिम्मेदाराना वक्तव्य देना चाहिए। इस विवादित बयान के बाद राजनीतिक दलों के बीच तीखी बहस और बयानबाज़ी देखने को मिल सकती है।
प्रदेश प्रशासन का भी ध्यान इस मामले की जांच और स्थिति को संभालने की ओर गया है, ताकि सामाजिक सौहार्द बिगड़े बिना सभी वर्गों के बीच शांति बनी रहे। हालांकि, इस मामले पर अभी तक भाजपा की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।




