फ्रांस की जानलेवा गर्मी पर अमेरिका को ठहराया जिम्मेदार, पेरिस की डिप्टी मेयर के बयान से छिड़ी बहस

यूरोप इस समय भीषण गर्मी और हीटवेव की चपेट में है। फ्रांस, स्पेन, इटली और अन्य यूरोपीय देशों में तापमान रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया है। इसी बीच पेरिस की डिप्टी मेयर ऑड्रे पुलवार ने फ्रांस में पड़ रही जानलेवा गर्मी और उससे हुई मौतों के लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराते हुए नया विवाद खड़ा कर दिया है।
ऑड्रे पुलवार ने कहा कि अमेरिका लंबे समय से दुनिया में सबसे अधिक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन करने वाले देशों में शामिल रहा है। उनका आरोप है कि दशकों तक वातावरण में भारी मात्रा में कार्बन उत्सर्जित करने के कारण जलवायु परिवर्तन तेज हुआ, जिसका असर अब यूरोप में भीषण गर्मी के रूप में दिखाई दे रहा है। उन्होंने दावा किया कि इसी जलवायु संकट के कारण फ्रांस में करीब 1,300 लोगों की मौत हुई है।
दरअसल, हाल के दिनों में अमेरिकी मीडिया और सोशल मीडिया पर पेरिस में एयर कंडीशनिंग की सीमित उपलब्धता का मजाक उड़ाया गया था। इसके जवाब में पुलवार ने कहा कि जिन शहरों में लगभग हर जगह एयर कंडीशनिंग मौजूद है, वे भी जलवायु परिवर्तन के प्रभाव से नहीं बच पाए हैं। उन्होंने अमेरिकी पत्रकारों और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स से कहा कि वे केवल आलोचना करने के बजाय जलवायु परिवर्तन की वास्तविक समस्या पर ध्यान दें।
दूसरी ओर, अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जर्नल ने पुलवार के बयान की आलोचना की। अखबार ने लिखा कि यूरोप में एयर कंडीशनिंग को लेकर सांस्कृतिक झिझक रही है, लेकिन लगातार बढ़ती गर्मी के बीच लोगों की प्राथमिकता अब ठंडक और सुरक्षा होगी।
विशेषज्ञों के अनुसार, जलवायु परिवर्तन के कारण दुनिया भर में हीटवेव की घटनाएं अधिक तीव्र और लंबी होती जा रही हैं। यूरोप में इस बार कई क्षेत्रों में तापमान 43 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, जिससे रेल सेवाएं प्रभावित हुई हैं, जंगलों में आग का खतरा बढ़ा है और स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव बढ़ गया है।
वहीं अमेरिका भी भीषण गर्मी से अछूता नहीं है। 1995 में शिकागो की हीटवेव और 2021 के पैसिफिक नॉर्थवेस्ट हीट डोम जैसी घटनाएं पहले ही सैकड़ों लोगों की जान ले चुकी हैं। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन एक वैश्विक चुनौती है, जिसका प्रभाव लगभग सभी देशों पर पड़ रहा है।



