Will Iran Be a Forever War?क्या ईरान हमेशा के लिए युद्ध बना रहेगा

Washington, DC
पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इराक और अफगानिस्तान में अपने पूर्ववर्तियों की तरह एक जटिल राजनीतिक और सैन्य जाल में फंसने का जोखिम उठाया है। हमारे मुख्य कूटनीतिक संवाददाता की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के साथ अमेरिकी रणनीति कई पूर्व अनुभवों का पुनरावृत्ति हो सकती है, जो लंबे समय तक चलने वाले संघर्षों को जन्म देती है।
इराक और अफगानिस्तान में दशकों से अस्तित्व में रहे अमेरिकी युद्धों ने दिखाया है कि सैन्य हस्तक्षेप से अधिक जटिल कूटनीतिक समाधान की आवश्यकता होती है। इन संघर्षों में लाखों लोगों की जान गई और अमेरिका को भारी आर्थिक व राजनीतिक नुकसान हुआ। ट्रम्प प्रशासन के दौरान ईरान के खिलाफ रुख तेजी से सख्त हुआ, विशेषकर 2018 में परमाणु समझौते से अमेरिका के बाहर निकलने के बाद।
विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रम्प की नीति ने तनाव को और बढ़ावा दिया, जिससे क्षेत्रीय सैन्य टकराव की संभावना बढ़ गई। इसी के चलते अमेरिका को एक बार फिर से एक लंबी और आसान न मानने वाली लड़ाई की ओर बढ़ते हुए देखा गया।
अमेरिकी विदेश नीति के जानकार मानते हैं कि ईरान के साथ कोई भी संघर्ष केवल सैन्य विकल्पों से हल नहीं किया जा सकता है। इस परिप्रेक्ष्य में पत्रकारों और विश्लेषकों ने ट्रम्प प्रशासन की रणनीति की आलोचना की है, जो शांति समाधान की तरफ पर्याप्त ध्यान नहीं दे पाई।
इसी कड़ी में, यह स्पष्ट है कि ईरान में स्थायी युद्ध की संभावना को भले ही टाल दिया जाए, लेकिन इसे पूरी तरह से समाप्त करना भी आसान नहीं होगा। मौके के अनुसार कूटनीतिक वार्ता और क्षेत्रीय सहयोग ही इस विवाद का उचित हल निकाल सकते हैं।
अन्त में, राष्ट्रपति ट्रम्प के कूटनीतिक कदमों ने इतिहास के कई सबकों को नजरअंदाज किया, जिससे यह सवाल उठता है कि क्या अमेरिका फिर से एक ऐसी जटिल सैन्य घाटी में धँस जाएगा जो दशकों तक जारी रहेगी।




