Uttar Pradesh

बेटा न मिलने पर पिता को थाने ले जाकर की बर्बरता, मौत के बाद दारोगा-सिपाही समेत छह पर मामला दर्ज

बलिया, उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में पुलिस हिरासत के दौरान एक व्यक्ति की मौत का मामला सामने आने के बाद सनसनी फैल गई है। इलाके के एक परिवार ने आरोप लगाया है कि एक मारपीट के विवाद में पुलिस ने आरोपी बेटे को थाने बुलाने के दबाव में उसके पिता को घर से उठा लिया और वहां उसकी पिटाई की गई। इलाज के दौरान वाराणसी के बीएचयू ट्रामा सेंटर में उनकी मौत हो गई। इस गंभीर घटना के बाद पुलिस विभाग ने तत्काल कार्रवाई की, जिसमें एक सब इंस्पेक्टर और एक कांस्टेबल को निलंबित कर थाने के प्रभारी को लाइन हाजिर किया गया है। क्षेत्राधिकारी पुलिस लाइन मंजरी राव को जांच सौंप दी गई है।

मारपीट के विवाद से शुरू हुई घटना

जानकारी के मुताबिक, यह घटना सात जुलाई की है। मृतक कामजी गोंड का बेटा विशाल अपने गांव में सूरज कन्नौजिया की दुकान पर मुर्गे का मांस खरीदने गया था। वहीं दोनों पक्षों के बीच किसी बात पर विवाद हुआ जो मारपीट में बदल गया। सूरज की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। परिजनों का आरोप है कि पुलिस आरोपी बेटे को ढूंढ़ रही थी, लेकिन उसे न मिलने पर उन्होंने कामजी गोंड को थाने ले जाकर दबाव बनाना शुरू किया।

पिटाई और पुलिस की लापरवाही का आरोप

आरोप है कि आठ जुलाई को रेवती थाने के सब इंस्पेक्टर सचिन सरोज और कांस्टेबल अंकित सिंह ने कामजी गोंड को हिरासत में ले लिया और उसके बेटे को थाने बुलाने का दबाव डाला। इस बीच कामजी के साथ मारपीट की गई, जिससे उनकी हालत गंभीर हो गई। परिजनों ने बताया कि पुलिस ने कामजी को सीधे परिवार को सौंपने के बजाय विपक्ष के पक्ष से जुड़े व्यक्तियों को दे दिया, जिसके बाद वह घर के पास ही बेहोशी की हालत में मिले। उनके शरीर पर चोट के स्पष्ट निशान थे।

इलाज के क्रम में हुई मौत

परिवार ने गांव में प्रारंभिक इलाज कराया, लेकिन हालत में सुधार न होने पर उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और फिर जिला अस्पताल रेफर किया गया। चिकित्सकों की सलाह पर गंभीर स्थिति में उन्हें वाराणसी के बीएचयू ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया गया। वहां इलाज के दौरान शुक्रवार देर रात उनकी मौत हो गई।

शव आने पर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन

शनिवार देर रात जब मृतक का शव गांव पहुंचा, तो रविवार सुबह बड़ी संख्या में ग्रामीण और परिवार के सदस्य एकत्रित हुए और आरोपितों के खिलाफ गिरफ्तारी की मांग करने लगे। आक्रोशित लोगों ने शव को सड़क पर रखकर जाम लगा दिया। प्रदर्शन में शामिल लोगों ने सभी आरोपितों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग की। पुलिस अधिकारियों ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए आश्वासन दिया।

दारोगा-सिपाही समेत छह पर केस और कार्रवाई

हरकत में आकर पुलिस ने मामला दर्ज करते हुए रेवती थाना के सब इंस्पेक्टर सचिन सरोज, कांस्टेबल अंकित सिंह, ग्राम प्रधान आशुतोष शंकर सिंह, उनके चालक मनीष यादव, सूरज कन्नौजिया और एक अन्य व्यक्ति के खिलाफ हत्या का प्रकरण खोला है। आरोपित दारोगा और सिपाही को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। साथ ही थाने के प्रभारी राजकेसर सिंह को लाइन हाजिर किया गया है। मामले की जांच अधिकारी क्षेत्राधिकारी पुलिस लाइन मंजरी राव द्वारा की जा रही है।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शरीर पर चोट के निशान

पुलिस के मुताबिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृतक के शरीर पर कई चोटों के निशान मिले हैं, हालांकि मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो पाया है। पुलिस अधीक्षक ओमवीर सिंह ने बताया कि जांच के लिए आवश्यक साक्ष्य सुरक्षित कर लिए गए हैं। डीआईजी सुनील कुमार सिंह ने इस मामले की गंभीरता देखते हुए मजिस्ट्रियल जांच के आदेश जारी किए हैं, ताकि निष्पक्ष और व्यापक जांच हो सके। जांच रिपोर्ट के आधार पर उचित कार्रवाई की जाएगी।

परिवार को न्याय का भरोसा

यह घटना पुलिस कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है और प्रशासन ने निष्पक्ष जांच का भरोसा दिया है। मृतक के परिवार और गांव वाले आरोपितों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। सभी की निगाहें अब जांच रिपोर्ट और आगामी कानूनी कार्यवाही पर टिकी हैं ताकि पीड़ित को उचित न्याय मिल सके।

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