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ओडिशा ने जापान समर्थित ₹67,000 करोड़ के प्रोजेक्ट्स के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए

Bhubaneswar, Odisha

2 जुलाई को ओडिशा सरकार ने अदानी एंटरप्राइजेज और संयुक्त अरब अमीरात की इंटरनेशनल होल्डिंग कंपनी (IHC) समूह के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते के तहत, दोनों कंपनियां राज्य के एल्यूमीनियम क्षेत्र में कुल ₹1.08 लाख करोड़ का निवेश करेंगी। यह निवेश ओडिशा के लिए अब तक का सबसे बड़ा विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) माना जा रहा है।

यह निवेश प्रदेश के औद्योगिक विकास और आर्थिक प्रगति के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा। एल्यूमीनियम क्षेत्र, जो पहले से ही ओडिशा की अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, अब इस निवेश के साथ और मजबूत होगा। इस परियोजना से न केवल स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़ेंगे बल्कि क्षेत्र की औद्योगिक क्षमता में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

अदानी एंटरप्राइजेज और IHC समूह की यह साझेदारी राज्य की उद्योग नीति के अनुरूप है, जिसमें विदेशी निवेश को प्रोत्साहित करने और सतत विकास को लेकर कई योजनाएं शामिल हैं। दोनों पक्षों ने इस अवसर पर कहा कि यह समझौता दोनों के बीच सहयोग को और गहरा करेगा और कई अन्य उद्योगों में भी निवेश की संभावनाओं को बढ़ावा देगा।

ओडिशा के मुख्यमंत्री ने इस MoU पर हस्ताक्षर के बाद कहा, ‘यह निवेश राज्य को एक वैश्विक औद्योगिक केंद्र के रूप में स्थापित करेगा। हम अपने संसाधनों की मदद से विकास की नई ऊंचाइयां छू रहे हैं। इस परियोजना से न केवल राज्य की अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा, बल्कि युवाओं को रोजगार भी मिलेगा।’

वहीं, अदानी ग्रुप और IHC के प्रतिनिधियों ने भरोसा जताया कि वे ओडिशा के साथ दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी बनाएंगे और प्रदेश के सामाजिक एवं आर्थिक विकास में योगदान देंगे।

विशेषज्ञ कहते हैं कि यह समझौता ओडिशा की विकास यात्रा में एक महत्वपूर्ण कदम है और आने वाले वर्षों में राज्य को निवेश का आकर्षक गंतव्य बनाने में सहायता करेगा। एल्यूमीनियम क्षेत्र में यह बड़ा निवेश प्रदेश के औद्योगिक नक्शे को बेहतर बनाएगा और विश्व स्तर पर ओडिशा की साख बढ़ाएगा।

संक्षेप में, अदानी एंटरप्राइजेज और IHC समूह का यह ₹1.08 लाख करोड़ का निवेश न केवल ओडिशा की अर्थव्यवस्था को मजबूती देगा, बल्कि यह विदेशी निवेश को आकर्षित करने में भी राज्य की भूमिका को मजबूत करेगा। राज्य सरकार की सक्रिय भूमिका और निवेश के लिए अनुकूल नीति वातावरण ने इस समझौते को संभव बनाया है।

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