टीएमसी में घमासान तेज, ममता बनर्जी के गुट ने बागी खेमे के खिलाफ दर्ज कराईं 4 पुलिस शिकायतें

कोलकाता, पश्चिम बंगाल – तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में आंतरिक संघर्ष ने एक नया मोड़ ले लिया है। पार्टी से बागी विधायक ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट के खिलाफ ममता बनर्जी के प्रमुख गुट ने पिछले 24 घंटों में कोलकाता और आसपास के चार पुलिस स्टेशनों में शिकायतें दर्ज कराई हैं।
इन शिकायतों को दर्ज कराने के पीछे मुख्य मुद्दा बागी गुट द्वारा पार्टी के नाम और सदस्यों का बिना अनुमति इस्तेमाल करना बताया जा रहा है। पुलिस शिकायतें कोलकाता के कालीघाट और प्रगति मैदान पुलिस थाना, तथा बिधाननगर के न्यू टाउन और साइबर थाना क्षेत्रों में दर्ज कराई गई हैं।
टीएमसी के माइनॉरिटी गुट के एक अंदरूनी सूत्र ने बताया कि शिकायतों का मूल कारण बागी गुट द्वारा अवैध तरीके से पार्टी के वरिष्ठ नेता अरूप रॉय को पार्टी का चेयरपर्सन घोषित करना है, जबकि ममता बनर्जी पार्टी की जीवन पर्यंत चेयरपर्सन हैं। यह नियुक्ति 2022 में हुई संगठनात्मक सम्मेलन के निर्णयों के खिलाफ है, जहां ममता को जीवनभर के लिए चेयरपर्सन बनाए रखने पर मत दिया गया था।
सूत्रों के अनुसार, उक्त सम्मेलन हर पांच साल में होना निर्धारित है और अगली कॉन्फ्रेंस 2027 में होने वाली है। इस बीच, केवल ममता बनर्जी ही विशेष सत्र बुलाने के लिए अधिकृत हैं। इसके बावजूद बागी गुट ने उनकी गैरमौजूदगी में अरूप रॉय को चेयरपर्सन घोषित कर दिया, जो पार्टी के नियमों के खिलाफ है।
इस विवाद ने टीएमसी के अंदर गुटबंदी की तस्वीर पेश की है, जहां पार्टी की एक शाखा संविधानिक प्रक्रिया को ताक पर रखकर अपने फायदे की रणनीति पर काम कर रही है। ममता बनर्जी की ओर से जाहिर किया गया है कि इस मामले को कानूनी एवं पुलिस कार्रवाई के जरिए निपटाया जाएगा।
वहीं, बागी गुट ने इस मामले को भारत निर्वाचन आयोग के समक्ष ले जाने का दावा किया है। उनका कहना है कि पार्टी के सदस्यों और फंड के अधिकारों के लिए आयोग में पहले ही मामला लंबित है और आरोपित कार्रवाई का फैसला वहीं से होगा।
पश्चिम बंगाल की राजनीति में टीएमसी की यह गुटबंदी आगामी विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी की छवि पर गंभीर असर डाल सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि नेतृत्व और संगठनात्मक विवाद पार्टी के लिए चुनौतीपूर्ण सिद्ध हो सकता है और इसकी नतीजों पर नजर रखी जानी चाहिए।
इस पूरे घटनाक्रम से यह साफ दिखता है कि टीएमसी के भीतर सत्ता संघर्ष गहराता जा रहा है और आने वाले समय में राजनीतिक हलचल तेज होने की संभावना है।




