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भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर केस: सुप्रीम कोर्ट ने CBI जांच की मांग पर सुनवाई से किया इनकार

नई दिल्ली: बिहार के भोजपुर जिले में भरत भूषण तिवारी के एनकाउंटर मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई जांच मांगे जाने वाली याचिका की सुनवाई से इनकार कर दिया है। शीर्ष अदालत ने विशेष टिप्पणी किए बिना याचिकाकर्ता को संबंधित हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने की सलाह दी है। यह आदेश न्यायपालिका द्वारा मामले की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए और विधिक प्रक्रिया का सम्मान करते हुए दिया गया।

यह मामला भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव का निवासी भरत भूषण तिवारी के कथित एनकाउंटर पर केंद्रित है। याचिकाकर्ता अवैध एनकाउंटर की आशंका जताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे थे। याचिका अधिवक्ता विशाल तिवारी के माध्यम से दायर की गई थी, जिसमें मामले की स्वतंत्र जांच और संबंधित पुलिस अधिकारियों और कर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने का अनुरोध किया गया था।

याचिकाकर्ता ने न्यायालय को बताया कि अगर मामले की जांच उचित रूप से केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपी जाती है तो अधिक पारदर्शिता और न्याय सुनिश्चित किया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार सेवानिवृत्त जजों की एक विशेषज्ञ समिति की निगरानी में होनी चाहिए ताकि पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष बनी रहे।

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में संस्पर्शी रूप से कहा कि यदि याचिकाकर्ता उचित समझे तो वे मामले को हाईकोर्ट में ले जाकर याचिका कर सकते हैं। कोर्ट ने संविधान के तहत मौलिक अधिकारों की रक्षा और कानून के शासन के प्रति अपने दायित्व को समझते हुए ऐसा निर्णय दिया है। यह कदम न्याय व्यवस्था में उचित कानूनी प्रक्रिया चलाने की दिशा में माना जा रहा है।

अभी याचिकाकर्ता के लिए हाईकोर्ट का रुख करना महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि वहीं पर इस मामले में विस्तार से जांच, एनकाउंटर की वैधता, पुलिस कार्यवाही की संवेदनशीलता और निष्पक्ष जांच के तर्कों पर गौर किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद कानूनी लड़ाई की अगली कड़ी उच्च न्यायालय में जारी रह सकती है।

भारतीय न्याय व्यवस्था में जांच एजेंसियों की स्वतंत्रता और प्रक्रिया की पारदर्शिता पर लगातार जोर दिया जाता रहा है। ऐसे मामलों में उचित जांच व सत्य की खोज ही न्याय की मूल भावना को सशक्त करती है। फिलहाल इस मामले में अगला चरण हाईकोर्ट के सामने तय होगा, जहां यथावकाश न्यायिक प्रक्रिया पूरी होगी।

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