अंतर्राष्ट्रीय समाचार: ईरान-अमेरिका समझौते के बाद भी पश्चिम एशिया में तनाव बरकरार

पश्चिम एशिया में कई महीनों से जारी संघर्ष के बीच हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते ने दुनिया को राहत की उम्मीद दी है, लेकिन क्षेत्र में तनाव अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। फ्रांस में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की घोषणा की गई, जिसका उद्देश्य क्षेत्रीय संघर्ष को कम करना और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर बनाना है।
इस समझौते के तहत होर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और आगे परमाणु कार्यक्रम पर विस्तृत वार्ता करने की योजना बनाई गई है। होर्मुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है, जहां से बड़ी मात्रा में तेल और गैस का परिवहन होता है। इसके खुलने से वैश्विक बाजारों में ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बनी अनिश्चितता कम होने की उम्मीद जताई जा रही है।
हालांकि शांति समझौते के बावजूद इजराइल और हिज़्बुल्लाह के बीच संघर्ष फिर से भड़क गया। दक्षिणी लेबनान में हुई हिंसक झड़पों के बाद दोनों पक्षों के बीच युद्धविराम को दोबारा लागू करना पड़ा। इस संघर्ष में कई लोगों की जान गई और बड़ी संख्या में नागरिक प्रभावित हुए। इस घटनाक्रम ने अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली आगे की वार्ताओं को भी प्रभावित किया है।
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर टुर्क ने अमेरिका-ईरान समझौते का स्वागत किया है और सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यदि सभी देश समझौते को ईमानदारी से लागू करते हैं तो क्षेत्र में स्थायी शांति की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हो सकती है। साथ ही उन्होंने लेबनान में जारी सैन्य कार्रवाइयों पर चिंता भी व्यक्त की।
फ्रांस, ब्रिटेन और जर्मनी जैसे यूरोपीय देशों ने भी स्पष्ट किया है कि ईरान के साथ किसी भी अंतिम परमाणु समझौते में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका होगी। फ्रांस ने कहा है कि संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंधों को हटाने से पहले ईरान को अपनी परमाणु और मिसाइल गतिविधियों पर स्पष्ट आश्वासन देना होगा।
इस बीच फ्रांस के एवियन शहर में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन में विश्व नेताओं ने वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और अंतरराष्ट्रीय सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा की। ईरान संकट सम्मेलन का सबसे महत्वपूर्ण विषय रहा क्योंकि इसका सीधा असर तेल की कीमतों और वैश्विक व्यापार पर पड़ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के महीनों में पश्चिम एशिया में हुए संघर्षों के कारण तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। जी-7 देशों ने इस बात पर जोर दिया कि क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखना वैश्विक आर्थिक विकास के लिए आवश्यक है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भी चेतावनी दी है कि यदि संघर्ष दोबारा बढ़ता है तो वैश्विक विकास दर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
भारत के लिए भी यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण है क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से पूरा करता है। होर्मुज़ जलडमरूमध्य में सामान्य स्थिति बहाल होने से भारत सहित कई एशियाई देशों को राहत मिल सकती है। वहीं आगामी ब्रिक्स सुरक्षा सलाहकार बैठक में ईरान से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा होने की संभावना है। यह बैठक नई दिल्ली में आयोजित होने जा रही है, जहां विभिन्न सदस्य देशों के प्रतिनिधि क्षेत्रीय सुरक्षा और सहयोग पर विचार-विमर्श करेंगे।
कुल मिलाकर, अमेरिका और ईरान के बीच हुआ समझौता शांति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, लेकिन इजराइल-लेबनान सीमा पर जारी तनाव यह संकेत देता है कि पश्चिम एशिया में स्थायी शांति स्थापित करने के लिए अभी लंबा रास्ता तय करना बाकी है। आने वाले दिनों में होने वाली कूटनीतिक वार्ताएं और अंतरराष्ट्रीय सहयोग ही यह तय करेंगे कि यह समझौता क्षेत्र में स्थिरता ला पाता है या नहीं।




