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ईरानी जहाज पर यूक्रेन के हमले से भड़का नया विवाद, होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ी सैन्य गतिविधियां; पश्चिम एशिया में फिर गहराया तनाव

नई दिल्ली, दिल्ली

पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच हाल ही में थमे सैन्य संघर्ष के बाद क्षेत्र में हालात सामान्य होने की उम्मीद की जा रही थी, लेकिन कैस्पियन सागर में एक ईरानी वाणिज्यिक जहाज पर हुए हमले ने एक बार फिर भू-राजनीतिक तनाव को बढ़ा दिया है। ईरान ने इस हमले के लिए यूक्रेन को जिम्मेदार ठहराते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी है और स्पष्ट चेतावनी दी है कि इस कार्रवाई का जवाब दिया जाएगा। इसके साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरानी सुरक्षा बलों की बढ़ी सक्रियता और अमेरिकी सैन्य ठिकानों को लेकर दिए गए बयानों ने पूरे क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है।

ईरान के विदेश मंत्रालय के अनुसार, कैस्पियन सागर में उसके एक व्यापारिक जहाज पर हमला किया गया, जिसमें चालक दल के एक सदस्य की मौत हो गई, जबकि दूसरा घायल हो गया। तेहरान ने इस घटना को संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून का उल्लंघन बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की है। विदेश मंत्रालय का कहना है कि यूक्रेन की यह कार्रवाई क्षेत्रीय शांति और समुद्री सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है। ईरान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद, यूरोपीय देशों और अन्य सदस्य देशों से इस मामले में हस्तक्षेप कर यूक्रेन को जवाबदेह ठहराने की मांग की है।

दूसरी ओर, यूक्रेन ने दावा किया कि जिस जहाज को निशाना बनाया गया, वह रूस और ईरान के बीच सैन्य आपूर्ति से जुड़ा हुआ था। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने आरोप लगाया कि रूस, ईरान को सैटेलाइट इंटेलिजेंस उपलब्ध करा रहा है, जिसके आधार पर खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और अन्य रणनीतिक गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। उन्होंने कहा कि यूक्रेनी खुफिया एजेंसियों के पास रूस और ईरान के बीच सैन्य सहयोग से जुड़े महत्वपूर्ण प्रमाण हैं और इन्हें सहयोगी देशों के साथ साझा किया जाएगा। जेलेंस्की के अनुसार जुलाई के मध्य में रूस ने बहरीन, जॉर्डन और कुवैत स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों की सैटेलाइट निगरानी बढ़ाई थी।

इसी बीच होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने समुद्री निगरानी तेज कर दी है। ईरानी मीडिया के अनुसार पिछले 24 घंटों के दौरान कई जहाजों को निर्धारित समुद्री मार्ग से हटकर चलने पर रोका गया। कुछ जहाजों पर चेतावनी के तौर पर गोलियां भी चलाई गईं ताकि वे ईरान द्वारा तय किए गए समुद्री गलियारों का पालन करें। इससे पहले भी बिना अनुमति निर्धारित मार्ग से गुजरने की कोशिश करने वाले कई जहाजों को रोका गया था। ईरान का कहना है कि यह कार्रवाई समुद्री सुरक्षा और अपने अधिकार क्षेत्र की रक्षा के लिए आवश्यक थी।

ईरानी सैन्य अधिकारियों ने आरोप लगाया है कि अमेरिका ने जून में हुए समझौते का उल्लंघन करते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य में वैकल्पिक समुद्री मार्ग तैयार करने की कोशिश की। ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद रजा अकरमिनिया के अनुसार, अमेरिका की इस पहल ने दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद तनाव को और बढ़ा दिया। उन्होंने यह भी कहा कि जॉर्डन, कुवैत और बहरीन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकाने ईरानी सैन्य रणनीति के दायरे में हैं और आवश्यकता पड़ने पर उन्हें निशाना बनाया जा सकता है।

उधर, अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फिलहाल ईरान के खिलाफ बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई की योजना रोक दी है। रिपोर्टों के अनुसार अमेरिकी रक्षा तंत्र में पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलों की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ने और कूटनीतिक प्रयासों को अवसर देने के उद्देश्य से यह फैसला लिया गया। हालांकि व्हाइट हाउस ने स्पष्ट किया है कि यदि अमेरिकी हितों, सहयोगी देशों या अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर कोई नया खतरा उत्पन्न होता है तो अमेरिका सभी विकल्पों पर विचार करेगा।

इस बीच कतर के परिवहन मंत्रालय ने घोषणा की है कि 26 जुलाई से समुद्री जहाजों और नौकाओं की आवाजाही फिर से सामान्य रूप से शुरू की जा सकती है। मंत्रालय ने सभी जहाजों को समुद्री सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन करने और यात्रा के दौरान सतर्क रहने की सलाह दी है। माना जा रहा है कि इससे क्षेत्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति में कुछ राहत मिलेगी, हालांकि सुरक्षा एजेंसियां अब भी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि ईरानी जहाज पर हमला, होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ती सैन्य गतिविधियां और रूस-यूक्रेन विवाद के नए आयाम ने पश्चिम एशिया की स्थिति को फिर से अस्थिर बना दिया है। यदि आने वाले दिनों में कूटनीतिक प्रयास सफल नहीं होते हैं तो इसका असर वैश्विक तेल बाजार, अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा पर पड़ सकता है। फिलहाल दुनिया की नजर ईरान, अमेरिका, यूक्रेन और खाड़ी क्षेत्र में तेजी से बदलते घटनाक्रम पर टिकी हुई है, जहां किसी भी नए घटनाक्रम का प्रभाव वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था पर देखने को मिल सकता है।

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