रवनीत सिंह बिट्टू के इस्तीफे से पंजाब की राजनीति में नई हलचल, भाजपा की चुनावी तैयारियों पर बढ़ी चर्चा

चंडीगढ़, पंजाब
केंद्रीय मंत्रिपरिषद से रवनीत सिंह बिट्टू के इस्तीफे ने पंजाब की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। इसके बाद मोदी सरकार में फिलहाल पंजाब का कोई मंत्री नहीं बचा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला केवल संवैधानिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि भाजपा की 2027 विधानसभा चुनाव की व्यापक रणनीति का हिस्सा हो सकता है।
रवनीत सिंह बिट्टू रेल मंत्रालय और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय में राज्य मंत्री थे। जून 2026 में उनका राज्यसभा कार्यकाल समाप्त हो गया था, लेकिन भाजपा ने उन्हें दोबारा राज्यसभा नहीं भेजा। संविधान के अनुसार वे छह महीने तक मंत्री बने रह सकते थे, फिर भी उन्होंने निर्धारित अवधि पूरी होने से पहले इस्तीफा दे दिया।
सूत्रों के मुताबिक भाजपा अब उन्हें पंजाब की राजनीति में पूरी तरह सक्रिय करना चाहती है। पार्टी उन्हें जाट सिख समुदाय के मजबूत नेता के रूप में सामने लाने की तैयारी कर रही है। पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय बेअंत सिंह के पोते होने के कारण उनकी राजनीतिक पहचान और जनसंपर्क को भाजपा चुनावी रणनीति में अहम मान रही है।
इस्तीफे से पहले बिट्टू ने मुख्यमंत्री भगवंत मान को पत्र लिखकर लंबित रेलवे परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने की मांग की थी। इससे यह भी संकेत मिला कि वे राज्य के विकास से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय बने रहना चाहते हैं।
राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि मंत्री पद से मुक्त होने के बाद बिट्टू अब पंजाब में भाजपा के सबसे सक्रिय नेताओं में शामिल हो सकते हैं। वे पहले भी कानून-व्यवस्था, सीमा सुरक्षा, नशे के बढ़ते कारोबार और धार्मिक मामलों को लेकर आम आदमी पार्टी सरकार पर लगातार सवाल उठाते रहे हैं।
इधर भाजपा हाल ही में तरुण चुघ को राज्यसभा भेज चुकी है। ऐसे में भविष्य में यदि केंद्रीय मंत्रिमंडल का विस्तार होता है तो पंजाब से किसी नए चेहरे को मंत्री बनाए जाने की संभावना भी जताई जा रही है। फिलहाल सभी की नजर इस बात पर है कि भाजपा आगामी चुनावों में बिट्टू की भूमिका किस तरह तय करती है।




