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ट्रंप का 60 देशों पर टैरिफ बम, भारत को मिली राहत; 10% शुल्क के दायरे में आया भारतीय आयात

Washington, D.C., United States

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने भारत सहित करीब 60 देशों से अमेरिका में होने वाले आयात पर नया टैरिफ लागू करने का फैसला किया है। इस नई नीति के तहत संबंधित देशों से आने वाले उत्पादों पर 10% और 12.5% तक अतिरिक्त आयात शुल्क लगाया जाएगा। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य वैश्विक व्यापार व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाना और उन उत्पादों के आयात को हतोत्साहित करना है, जिनके निर्माण में जबरन मजदूरी (Forced Labour) का इस्तेमाल होने की आशंका होती है।

हालिया बदलावों के बाद भारत को इस नई व्यवस्था में कुछ राहत मिली है। अमेरिकी प्रशासन ने भारत को 10% वाले टैरिफ वर्ग में रखा है, जबकि कुछ अन्य देशों पर 12.5% तक का शुल्क लगाया जाएगा। इससे भारतीय निर्यातकों पर अपेक्षाकृत कम अतिरिक्त बोझ पड़ेगा और भारतीय उत्पाद अमेरिकी बाजार में अन्य देशों की तुलना में बेहतर प्रतिस्पर्धा बनाए रख सकते हैं।

यह नया टैरिफ अमेरिका के ट्रेड एक्ट, 1974 की धारा 301 के तहत लागू किया गया है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) के कार्यालय के अनुसार, नई शुल्क व्यवस्था शुक्रवार रात 12:01 बजे (EDT) से प्रभावी हो जाएगी। इसके साथ ही पहले लागू अस्थायी 10% वैश्विक टैरिफ समाप्त हो जाएगा और उसकी जगह नई दरें लागू होंगी।

हालांकि, अमेरिकी प्रशासन ने उन आयातकों को सीमित राहत भी दी है जिनका सामान पहले से परिवहन में है। ऐसे उत्पाद यदि 28 जुलाई तक अमेरिका पहुंच जाते हैं तो उन पर नई टैरिफ दरें लागू नहीं होंगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य पहले से भेजे गए माल पर अचानक अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ने से बचाना है।

अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि यह नीति केवल राजस्व बढ़ाने के लिए नहीं बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में पारदर्शिता और मानवाधिकारों के संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए बनाई गई है। प्रशासन चाहता है कि उसके व्यापारिक साझेदार ऐसे उत्पादों के आयात और निर्यात पर सख्ती करें जिनके निर्माण में जबरन मजदूरी या श्रमिकों के शोषण की शिकायतें सामने आती रही हैं।

व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के लिए 10% टैरिफ दर अपेक्षाकृत राहत देने वाली साबित हो सकती है। हालांकि अतिरिक्त शुल्क का असर कुछ निर्यात क्षेत्रों पर पड़ सकता है, लेकिन भारत की स्थिति कई अन्य देशों की तुलना में बेहतर मानी जा रही है। आने वाले समय में यह देखा जाएगा कि नई अमेरिकी व्यापार नीति का वैश्विक व्यापार और भारत-अमेरिका के कारोबारी संबंधों पर कितना प्रभाव पड़ता है।

Washington, D.C., United States

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने भारत सहित करीब 60 देशों से अमेरिका में होने वाले आयात पर नया टैरिफ लागू करने का फैसला किया है। इस नई नीति के तहत संबंधित देशों से आने वाले उत्पादों पर 10% और 12.5% तक अतिरिक्त आयात शुल्क लगाया जाएगा। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य वैश्विक व्यापार व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाना और उन उत्पादों के आयात को हतोत्साहित करना है, जिनके निर्माण में जबरन मजदूरी (Forced Labour) का इस्तेमाल होने की आशंका होती है।

हालिया बदलावों के बाद भारत को इस नई व्यवस्था में कुछ राहत मिली है। अमेरिकी प्रशासन ने भारत को 10% वाले टैरिफ वर्ग में रखा है, जबकि कुछ अन्य देशों पर 12.5% तक का शुल्क लगाया जाएगा। इससे भारतीय निर्यातकों पर अपेक्षाकृत कम अतिरिक्त बोझ पड़ेगा और भारतीय उत्पाद अमेरिकी बाजार में अन्य देशों की तुलना में बेहतर प्रतिस्पर्धा बनाए रख सकते हैं।

यह नया टैरिफ अमेरिका के ट्रेड एक्ट, 1974 की धारा 301 के तहत लागू किया गया है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) के कार्यालय के अनुसार, नई शुल्क व्यवस्था शुक्रवार रात 12:01 बजे (EDT) से प्रभावी हो जाएगी। इसके साथ ही पहले लागू अस्थायी 10% वैश्विक टैरिफ समाप्त हो जाएगा और उसकी जगह नई दरें लागू होंगी।

हालांकि, अमेरिकी प्रशासन ने उन आयातकों को सीमित राहत भी दी है जिनका सामान पहले से परिवहन में है। ऐसे उत्पाद यदि 28 जुलाई तक अमेरिका पहुंच जाते हैं तो उन पर नई टैरिफ दरें लागू नहीं होंगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य पहले से भेजे गए माल पर अचानक अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ने से बचाना है।

अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि यह नीति केवल राजस्व बढ़ाने के लिए नहीं बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में पारदर्शिता और मानवाधिकारों के संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए बनाई गई है। प्रशासन चाहता है कि उसके व्यापारिक साझेदार ऐसे उत्पादों के आयात और निर्यात पर सख्ती करें जिनके निर्माण में जबरन मजदूरी या श्रमिकों के शोषण की शिकायतें सामने आती रही हैं।

व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के लिए 10% टैरिफ दर अपेक्षाकृत राहत देने वाली साबित हो सकती है। हालांकि अतिरिक्त शुल्क का असर कुछ निर्यात क्षेत्रों पर पड़ सकता है, लेकिन भारत की स्थिति कई अन्य देशों की तुलना में बेहतर मानी जा रही है। आने वाले समय में यह देखा जाएगा कि नई अमेरिकी व्यापार नीति का वैश्विक व्यापार और भारत-अमेरिका के कारोबारी संबंधों पर कितना प्रभाव पड़ता है।

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