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चन्नी ने अपनी ताकत का प्रदर्शन किया, पंजाब कांग्रेस पुनर्गठन के बीच रंधावा-शाह की मुलाकात से उठीं अटकलें

चंडीगढ़, पंजाब। पंजाब कांग्रेस में आगामी पुनर्गठन को लेकर सियासी वाद-विवाद और चर्चाओं के बीच, प्रदेश के महत्वपूर्ण नेता सुखजिंदर सिंह रंधावा की गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात ने नई हलचल पैदा कर दी है। कांग्रेस सांसद रंधावा ने इस मुलाकात को केवल कानून-व्यवस्था के मुद्दों तक सीमित बताया है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसके खिलाफ कई तरह की अटकलें तेज हो गई हैं।

पंजाब में कांग्रेस की नई टीम गठन को लेकर चल रही चर्चाओं ने पिछले कुछ हफ्तों में गति पकड़ी है। मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने हाल ही में अपनी ताकत का शानदार प्रदर्शन करते हुए पार्टी में अपनी पकड़ दिखाई है, लेकिन पंजाब की सियासत में अब तक की किसी भी संभावित फेरबदल को लेकर असमंजस बरकरार है। इसी बीच, रंधावा-शाह की मुलाकात को लेकर उठ रही चर्चाएं पंजाब कांग्रेस के अंदरूनी समीकरणों में संभावित बदलावों के संकेत के तौर पर देखी जा रही हैं।

सुखजिंदर सिंह रंधावा ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि अमित शाह से उनकी बैठक का मकसद केवल पंजाब में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर चर्चा करना था। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसमें किसी राजनीतिक मुद्दे या संगठनात्मक फेरबदल से जुड़ी कोई बात नहीं हुई। उन्होंने कहा, “हमारी बातचीत में हम मुख्य रूप से प्रदेश के शांति और सुरक्षा के मसलों पर चर्चा कर रहे थे।”

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस दौर में कोई भी राजनीतिक मुलाकात सामान्य नहीं होती। अमित शाह जैसे वरिष्ठ केंद्रीय नेता के साथ रंधावा की बातचित से पंजाब कांग्रेस के अंदर धोखे की स्थिति का संकेत भी मिलता है। कई विभागीय सूत्रों की मानें तो पार्टी के उच्च कमान में भी बदलावों पर फैसला अंतिम चरण में है, और चन्नी शिविर को कट्टरपंथी विपक्ष के बढ़ते दबाव के बीच अपनी पकड़ मजबूत करनी है।

पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू भी इस बदलाव की हवा में नजर आ रहे हैं, हालांकि उन्होंने किसी भी अटकलों को नकारते हुए कहा कि सभी निर्णय शांतिपूर्वक और पार्टी की बेहतरी के लिए लिए जाएंगे। उन्होंने सदस्यों से संयम बरतने और परिस्थितियों को समझने का आह्वान किया।

पंजाब में सत्तारूढ़ कांग्रेस के लिए यह दौर चुनौतिपूर्ण है क्योंकि आम आदमी पार्टी समेत अन्य प्रतिद्वंद्वी दल लगातार पिछड़े वर्गों और युवाओं में अपनी पकड़ मजबूत कर रहे हैं। ऐसे समय में अन्दरूनी अत्यावश्यक बदलाव पार्टी की साख और मजबूती के लिए जरूरी दिख रहे हैं।

फिलहाल, पंजाब कांग्रेस पुनर्गठन को लेकर अनिश्चितता का माहौल जारी है। लेकिन इस मुलाकात ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या पंजाब की सियासत में जल्द ही कोई बड़ा राजनीतिक फेरबदल होने वाला है, या यह केवल एक प्रशासनिक चर्चा थी।

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