पूरे देश में यूसीसी लागू हो, तुष्टिकरण की राजनीति खत्म करने का समय आ गया : उज्ज्वल दीपक

रायपुर। भाजपा नेता उज्ज्वल दीपक ने पश्चिम बंगाल में यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) लागू करने और ‘लव जिहाद’ तथा धर्मांतरण के खिलाफ सख्त कानून बनाने की घोषणा का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि अब पूरे देश में समान कानून लागू करने का समय आ गया है, जिससे तुष्टिकरण की राजनीति समाप्त हो सकेगी।
उज्ज्वल दीपक ने कहा, “सिर्फ पश्चिम बंगाल में ही नहीं, बल्कि पूरे भारत में एक जैसे कानून लागू करने का समय आ चुका है। जब हम बराबरी की बात करते हैं, तो विपक्षी पार्टियों को असमानता की वकालत नहीं करनी चाहिए। वर्षों से देश में तुष्टिकरण की नीति चली आ रही है, जिसमें कुछ समुदायों और धर्मों को अति प्रोत्साहन देने की कोशिश होती रही है। यह पुरानी सोच अब खत्म होनी चाहिए। देश के हर नागरिक के अधिकार और कर्तव्य समान होने चाहिए और कानून सबके लिए समान रूप से लागू होना चाहिए।”
उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की पुत्री शर्मिष्ठा मुखर्जी के हालिया बयान का उल्लेख करते हुए कहा, “शर्मिष्ठा मुखर्जी का बयान मैंने पढ़ा है, जिसमें उन्होंने बताया कि उन्हें अपने पिता ने कहा था कि नरेंद्र मोदी पहले ऐसे प्रधानमंत्री हैं जिन्हें तीन बार लगातार लोकसभा चुनाव से विजय मिली है। भारत रत्न प्रणब मुखर्जी जैसे सम्मानित व्यक्तित्व की यह टिप्पणी अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रधानमंत्री मोदी विश्व के चुनिंदा नेताओं में से हैं और उनका कार्यकाल स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज किया जाएगा।”
अखिल भारतीय कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के हालिया बयानों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए उज्ज्वल दीपक ने कहा, “मेरा मानना है कि यूपीए सरकार 2014 में सत्ता से विदा हो गई थी। उसके बाद देश की विदेश नीति में व्यापक बदलाव आए हैं। वर्तमान विदेश मंत्री और प्रधानमंत्री पिछले 12 वर्षों से देश की जिम्मेदारियों को बखूबी निभा रहे हैं। विदेश मामलों से जुड़ी कोई भी बात उचित रूप से केवल विदेश मंत्रालय, प्रधानमंत्री या विदेश मंत्री ही रख सकते हैं।”
सीबीएसई द्वारा तीन भाषा फॉर्मूला लागू करने के फैसले का समर्थन करते हुए भाजपा नेता ने कहा, “भारत एक विविधताओं से भरपूर देश है, जहां कई भाषाएं और हजारों बोलियां बोली जाती हैं। सीबीएसई का यह निर्णय हर छात्र को उसकी भाषा या बोली में पढ़ाई का अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से लिया गया है ताकि वह अपने भाषा माहौल में अधिक सहज और प्रभावी ढंग से पढ़ाई कर सके। यह शिक्षा को अधिक समावेशी और सुविधाजनक बनाने की एक सकारात्मक पहल है, जिसका पूरे दिल से स्वागत किया जाना चाहिए।”




