राज्यसभा चुनावः नटराजन मामले को लेकर चुनाव आयोग से मिले कांग्रेस नेताओं ने फैसले को निरस्त करने की मांग की

भोपाल, मध्य प्रदेश: कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को निर्वाचन आयोग से मुलाकात की और मध्य प्रदेश से कांग्रेस की राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन के नामांकन रद्द करने के फैसले को तत्काल निरस्त करने की मांग की। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि निर्वाचन अधिकारी द्वारा लिया गया यह निर्णय संविधान और गणतंत्र के खिलाफ है तथा इसे सहन नहीं किया जा सकता।
चुनाव आयोग पहुंचकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता केसी वेणुगोपाल, जयराम रमेश, भूपेश बघेल, रणदीप सुरजेवाला, दीपा दासमुंशी, विवेक तन्खा, अभिषेक सिंघवी और खुद मीनाक्षी नटराजन ने आयोग को अपने तर्क और तथ्य पेश किए। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दो अन्य आयुक्तों से भेंट कर पार्टी का पक्ष रखा और एक ज्ञापन भी सौंपा।
केसी वेणुगोपाल ने संवाददाताओं को बताया कि उन्होंने आयोग के सामने पूरे मामले का विस्तार से विवरण रखा है। वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी ने कहा कि निर्वाचन अधिकारी का फैसला पूरी तरह विकृत और गैरकानूनी है, जिसे न्यायालय के मानदंडों के तहत स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ कोई ठोस आपराधिक मामला फिलहाल अस्तित्व में नहीं है।
सिंघवी ने कहा, “मजिस्ट्रेट द्वारा अभी तक इस पूरे मामले में कोई संज्ञान नहीं लिया गया है। यह एक प्रारंभिक प्रक्रिया है, जिसमें फैसला होता है कि जांच आगे होगी या नहीं। बिना इस संज्ञान के कोई अपराधिक मुकदमा दर्ज नहीं होता। लेकिन निर्वाचन अधिकारी ने बिना इस प्रक्रिया को पूरा किए ही नामांकन रद्द कर दिया।”
उन्होंने आगे बताया कि चुनाव आयोग के नियमों में स्पष्ट तौर पर यह उल्लेख है कि उम्मीदवार को केवल ऐसे अपराधों की जानकारी देनी होती है जिनमें सजा दो साल से अधिक की हो और जिनमें आरोप निर्धारित कर दिए गए हों। इस मामले में ऐसा कुछ नहीं है।
प्रतिनिधिमंडल ने यह भी कहा कि इस प्रकार के फैसले से न केवल उम्मीदवार के मौलिक अधिकारों का हनन होता है, बल्कि यह संविधान का मूल ढांचा भी प्रभावित करता है और चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लगाता है। उन्होंने चुनाव आयोग से आग्रह किया कि वे आरओ के इस आदेश को निरस्त कर उचित न्याय सुनिश्चित करें।
मीनाक्षी नटराजन के नामांकन रद्द किए जाने का कारण बीजेपी के उम्मीदवार महेश केवट द्वारा शिकायत दर्ज कराना था, जिसमें आरोप था कि नटराजन ने तेलंगाना में उनके खिलाफ चल रहे मुकदमे का उल्लेख अपने शपथपत्र में नहीं किया। मध्य प्रदेश में होने वाले राज्यसभा चुनाव के मद्देनजर यह मुद्दा काफी संवेदनशील बन गया है। राज्यसभा की तीन सीटों के लिए मतदान 18 जून को निर्धारित है।
कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल की इस मांग से स्पष्ट है कि वह चुनाव आयोग के इस निर्णय के खिलाफ कड़ा विरोध जताने को तैयार है और आगामी चुनाव प्रक्रिया में इस मुद्दे को संजीदगी से उठाएगी। निर्वाचन आयोग की प्रतिक्रिया का इंतजार है, जिससे इस मामले की राजनीतिक और कानूनी जटिलताएं और स्पष्ट हो सकेंगी।


