Entertainment

‘राजपूती कंगन’ से ‘गंगूबाई’ तक… संजय लीला भंसाली की फिल्मों की ये हीरोइनें बनीं ताकत की पहचान

भंसाली की फिल्मों में महिला किरदारों का रहा अलग ही दबदबा

मुंबई, महाराष्ट्र। हिंदी सिनेमा में संजय लीला भंसाली उन फिल्मकारों में शामिल हैं जिन्होंने अपनी फिल्मों में महिला किरदारों को सबसे मजबूत और प्रभावशाली रूप में पेश किया। उनकी फिल्मों में हीरोइनें केवल मुख्य अभिनेत्री नहीं होतीं, बल्कि पूरी कहानी की धुरी बन जाती हैं। यही वजह है कि रानी पद्मावती, मस्तानी, काशीबाई, पारो, चंद्रमुखी, गंगूबाई और हीरामंडी के कई किरदार आज भी दर्शकों के दिलों में अपनी खास जगह बनाए हुए हैं।

‘पद्मावत’ की रानी पद्मावती ने दिखाया स्वाभिमान

साल 2018 में रिलीज हुई ‘पद्मावत’ में दीपिका पादुकोण ने रानी पद्मावती का किरदार निभाया। फिल्म का चर्चित संवाद “राजपूती कंगन में उतनी ही ताकत है जितनी राजपूती तलवार में” महिला सम्मान और साहस का प्रतीक बन गया। भंसाली की भव्य प्रस्तुति और दीपिका के अभिनय को दर्शकों और समीक्षकों दोनों ने सराहा।

‘राम-लीला’ की लीला ने जीता युवाओं का दिल

साल 2013 में आई ‘गोलियों की रासलीला राम-लीला’ में दीपिका पादुकोण ने लीला के किरदार में दमदार अभिनय किया। फिल्म का संवाद “बेशरम, बदतमीज, खुदगर्ज होता है… पर प्यार तो ऐसा ही होता है” आज भी सबसे लोकप्रिय रोमांटिक संवादों में गिना जाता है। रणवीर सिंह और दीपिका की जोड़ी ने फिल्म को बड़ी व्यावसायिक सफलता दिलाई।

‘बाजीराव मस्तानी’ की दो यादगार महिलाएं

‘बाजीराव मस्तानी’ में प्रियंका चोपड़ा की काशीबाई और दीपिका पादुकोण की मस्तानी दोनों ही किरदारों ने दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ी। काशीबाई का दर्द और मस्तानी का निडर प्रेम कहानी की सबसे बड़ी ताकत बने। दोनों के संवाद आज भी सोशल मीडिया पर खूब साझा किए जाते हैं और फिल्मों के प्रतिष्ठित दृश्यों में शामिल हैं।

‘देवदास’ की पारो और चंद्रमुखी बनीं सिनेमाई विरासत

भंसाली की क्लासिक फिल्म ‘देवदास’ में ऐश्वर्या राय और माधुरी दीक्षित ने अपने अभिनय से अलग मुकाम हासिल किया। चंद्रमुखी का संवाद “प्यार का कारोबार तो बहुत बार किया है… मगर प्यार सिर्फ एक बार” वर्षों बाद भी दर्शकों के बीच लोकप्रिय है। यह फिल्म आज भी हिंदी सिनेमा की सर्वश्रेष्ठ क्लासिक फिल्मों में गिनी जाती है।

‘गंगूबाई काठियावाड़ी’ ने बदली आलिया भट्ट की छवि

साल 2022 में रिलीज हुई ‘गंगूबाई काठियावाड़ी’ में आलिया भट्ट ने अपने करियर का सबसे चर्चित अभिनय किया। उनका संवाद “जब शक्ति, संपत्ति और सद्बुद्धि तीनों ही औरतें हैं, तो इन मर्दों के किस बात का गुरूर?” फिल्म की पहचान बन गया। इस भूमिका ने आलिया को एक सशक्त अभिनेत्री के रूप में नई पहचान दिलाई।

‘हीरामंडी’ से OTT पर भी छाए भंसाली

संजय लीला भंसाली ने वेब सीरीज ‘हीरामंडी’ के जरिए ओटीटी प्लेटफॉर्म पर भी अपनी अलग छाप छोड़ी। मनीषा कोईराला, सोनाक्षी सिन्हा, अदिति राव हैदरी, ऋचा चड्ढा, संजीदा शेख और शर्मिन सहगल ने अपने प्रभावशाली अभिनय से सीरीज को यादगार बनाया। इसकी भव्यता, संगीत और दमदार महिला किरदारों की व्यापक चर्चा हुई।

महिला-केंद्रित सिनेमा के पर्याय बन चुके हैं भंसाली

संजय लीला भंसाली की फिल्मों की सबसे बड़ी पहचान उनकी मजबूत महिला पात्र हैं। उनकी कहानियों में महिलाएं साहस, आत्मसम्मान, प्रेम और संघर्ष का प्रतीक बनकर उभरती हैं। यही कारण है कि उनके द्वारा गढ़े गए किरदार समय के साथ और भी यादगार होते गए हैं और आज भी हिंदी सिनेमा में मजबूत महिला भूमिकाओं का उदाहरण माने जाते हैं।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button