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हिटलर की जन्मस्थली बनेगी पुलिस स्टेशन, चरमपंथियों के जमावड़े को रोकने के लिए ऑस्ट्रिया सरकार का बड़ा फैसला

ब्रौनाउ एम इन, ऑस्ट्रिया

ऑस्ट्रिया सरकार ने जर्मन तानाशाह एडॉल्फ हिटलर के जन्मस्थान को लेकर लंबे समय से चल रही बहस पर बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने उस ऐतिहासिक इमारत को पुलिस स्टेशन में बदलने का निर्णय लिया है, जहां 20 अप्रैल 1889 को हिटलर का जन्म हुआ था। इस कदम का मुख्य उद्देश्य इस स्थान को चरमपंथी विचारधारा के समर्थकों के लिए प्रतीकात्मक तीर्थस्थल बनने से रोकना और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना है।

यह इमारत ऑस्ट्रिया के ब्रौनाउ एम इन शहर में जर्मनी की सीमा के पास स्थित है। 17वीं शताब्दी में बनी यह इमारत साल्जबर्गर वोरस्टेड 15 पते पर मौजूद है और वर्षों से विवाद का केंद्र बनी हुई थी। सरकार ने इस भवन का राष्ट्रीयकरण कर इसे अपने नियंत्रण में ले लिया था। अब व्यापक नवीनीकरण के बाद यहां आधुनिक पुलिस स्टेशन स्थापित किया गया है। इस परियोजना पर लगभग 20 मिलियन यूरो की लागत आई है।

ऑस्ट्रिया के आंतरिक मंत्री गेरहार्ड कार्नर इस नए पुलिस स्टेशन का औपचारिक उद्घाटन करेंगे। सरकार का मानना है कि भवन का प्रशासनिक और सुरक्षा संबंधी उपयोग इस स्थान के प्रतीकात्मक महत्व को कम करेगा और इसे नाजी विचारधारा का समर्थन करने वाले लोगों के आकर्षण का केंद्र बनने से रोकेगा।

दरअसल, हिटलर के जन्मस्थान के भविष्य को लेकर कई वर्षों से ऑस्ट्रिया में बहस चल रही थी। सरकार ने इस विषय पर 13 विशेषज्ञों का एक आयोग गठित किया था। आयोग ने वर्ष 2016 में अपनी रिपोर्ट में सुझाव दिया कि इस इमारत को संग्रहालय में नहीं बदला जाना चाहिए। विशेषज्ञों का तर्क था कि ऐसा करने से कुछ लोग इस स्थान का गलत तरीके से प्रचार-प्रसार कर सकते हैं और यह चरमपंथी समूहों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकता है।

इमारत को पूरी तरह ध्वस्त करने का विकल्प भी सामने आया था, लेकिन यह योजना लागू नहीं हो सकी। इसकी वजह यह थी कि यह भवन शहर के ऐतिहासिक केंद्र का हिस्सा है और विरासत संरक्षण कानून के तहत सुरक्षित है। विशेषज्ञों का मानना था कि अगर इस इमारत को गिराया जाता है तो इसे इतिहास को मिटाने या नकारने की कोशिश के रूप में भी देखा जा सकता है।

आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि पुलिस स्टेशन के रूप में इस भवन का उपयोग सबसे उपयुक्त विकल्प होगा। इससे इमारत में आम लोगों की अनियंत्रित आवाजाही सीमित रहेगी, सरकारी उपस्थिति बनी रहेगी और यह स्थान किसी भी प्रकार की चरमपंथी गतिविधियों का केंद्र बनने से बच सकेगा। साथ ही भवन का उपयोग सार्वजनिक हित और कानून-व्यवस्था से जुड़ी गतिविधियों के लिए होगा, जिससे इसका सामाजिक महत्व भी बदल जाएगा।

हालांकि, सरकार के इस फैसले को लेकर सभी लोग सहमत नहीं हैं। वर्ष 2023 में इस भवन के भविष्य पर चर्चा करने वाले एक नागरिक समूह द्वारा कराए गए सर्वेक्षण में लगभग एक हजार लोगों ने हिस्सा लिया था। सर्वेक्षण के अनुसार केवल 6 प्रतिशत लोगों ने भवन को प्रशासनिक उपयोग में लाने का समर्थन किया। वहीं आधे से अधिक प्रतिभागियों का मानना था कि यहां नाजीवाद और फासीवाद के खिलाफ जागरूकता फैलाने वाला स्मारक या शैक्षणिक केंद्र बनाया जाना चाहिए। करीब एक चौथाई लोगों ने इस इमारत को पूरी तरह गिरा देने का सुझाव भी दिया था।

फिर भी ऑस्ट्रिया सरकार का मानना है कि पुलिस स्टेशन स्थापित करना सबसे व्यावहारिक और संतुलित समाधान है। इससे न केवल भवन का उपयोग सार्वजनिक हित में होगा, बल्कि यह संदेश भी जाएगा कि लोकतांत्रिक संस्थाएं इतिहास के संवेदनशील अध्यायों से जुड़े स्थलों का इस्तेमाल कानून और व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कर सकती हैं। सरकार को उम्मीद है कि यह कदम भविष्य में इस स्थान को चरमपंथी विचारधारा के प्रचार-प्रसार का केंद्र बनने से रोकने में प्रभावी साबित होगा।

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