पद्म विभूषण प्राप्त पंडवानी गायिका तीजन बाई का रायपुर AIIMS में निधन, पीएम मोदी ने जताया दुख

रायपुर, छत्तीसगढ़। छत्तीसगढ़ की नामचीन पंडवानी गायिका और पद्म विभूषण सम्मानित लोक कलाकार तीजन बाई का रविवार तड़के निधन हो गया। वह 70 वर्ष की थीं और कुछ समय से बीमार चल रही थीं। रायपुर के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में इलाज के दौरान उन्होंने सुबह लगभग 3:15 बजे अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से लोककला क्षेत्र, सांस्कृतिक जगत और देश भर के कला प्रेमियों में शोक की लहर दौड़ गई है।
AIIMS के चिकित्सा अधिकारियों के अनुसार, तीजन बाई को 27 मई से अस्पताल में भर्ती कर उनका उपचार चल रहा था। स्वास्थ्य में लगातार गिरावट आई और रविवार तड़के उनका निधन हो गया।
पंडवानी को विश्वभर में पहचान दिलाने वाली महान कलाकार
दुर्ग जिले की रहने वाली तीजन बाई ने अपनी शक्तिशाली आवाज, बेहतरीन मंच प्रस्तुति और विशिष्ट कथा-वाचन शैली के माध्यम से छत्तीसगढ़ की लोककला पंडवानी को राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई। पंडवानी महाभारत की कथाओं को संगीत, अभिनय और भावपूर्ण कथन के रूप में प्रस्तुत करता है।
तीजन बाई ने दशकों तक देश-विदेश में सैकड़ों प्रस्तुतियां देकर भारतीय लोकसंस्कृति का गौरव बढ़ाया। उनकी प्रस्तुति शैली ने लाखों दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया और उन्हें देश के सबसे प्रतिष्ठित लोक कलाकारों में शुमार कर दिया।
भारतीय लोककला में उनके अतुलनीय योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें पद्म श्री, पद्म भूषण और बाद में पद्म विभूषण से सम्मानित किया था।
प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री ने दी श्रद्धांजलि
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर तीजन बाई के निधन पर गहरा शोक जताते हुए लिखा कि उन्होंने अपनी अद्वितीय कला से छत्तीसगढ़ की पंडवानी लोककला को विश्व मंच पर पहचान दिलाई। उनका निधन भारतीय कला-संस्कृति जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने उनके परिवार और प्रशंसकों को संवेदना दी और श्रद्धांजलि अर्पित की।
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने भी भावुक संदेश जारी कर कहा कि तीजन बाई केवल छत्तीसगढ़ की नहीं, बल्कि पूरे देश की सांस्कृतिक धरोहर थीं। उन्होंने लोक कला को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत रहेगा।
लोककला जगत ने खोया एक अनमोल रत्न
तीजन बाई का निधन भारतीय लोकसंस्कृति के लिए बहुत बड़ा धक्का माना जा रहा है। कलाकारों, साहित्यकारों और समाजिक संगठनों ने उनके आकस्मिक निधन पर गहरा शोक व संवेदना व्यक्त की है। उनके जीवन और कला ने यह प्रमाणित किया कि लोक परंपराएं सिर्फ सीमित क्षेत्र तक नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में भारतीय संस्कृति का प्रतिनिधित्व कर सकती हैं।
अपनी अनूठी गायन शैली, अभिनय और महाभारत की जीवंत प्रस्तुतियों के माध्यम से तीजन बाई भारतीय लोककला के इतिहास में सदैव अमर रहेंगी। उनका उल्लेख भविष्य की पीढ़ियों के लिए प्रेरणादायक बनेगा।




