प्रद्युम्न चतुर्थी 2026 पर बनेंगे दुर्लभ महासंयोग, गुरु पुष्य और सर्वार्थ सिद्धि योग में करें गणेश पूजा

भोपाल, मध्य प्रदेश – ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की चतुर्थी के दिन मनाई जाने वाली प्रद्युम्न चतुर्थी इस वर्ष 18 जून 2026 को विशेष गुणों और महापावन अवसरों के साथ आएगी। यह दिन भगवान गणेश की पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है, और इस बार गुरु पुष्य योग तथा सर्वार्थ सिद्धि योग का योग बनना इसे और भी महत्व देता है। भक्तजन इस दिन विशेष व्रत और पूजा के माध्यम से जीवन की हर बाधा से मुक्ति पाने और सुख-शांति की प्राप्ति के लिए प्रार्थना करते हैं।
धार्मिक मान्यताओं में भगवान गणेश को विघ्नहर्ता कहा गया है, जो हर कार्य में आने वाली रुकावटों को दूर कर मार्ग प्रशस्त करते हैं। प्रद्युम्न चतुर्थी के दिन गणेश जी की विशेष पूजा से करियर, व्यापार, शिक्षा व पारिवारिक जीवन में आने वाली समस्याओं का समाधान मिलना संभव माना जाता है। देशभर में गणेश भक्त इस दिन व्रत रखते हैं और विधिवत पूजा-अर्चना करते हैं।
प्रद्युम्न चतुर्थी पर गुरु पुष्य योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का महत्व
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस वर्ष प्रद्युम्न चतुर्थी के साथ गुरु पुष्य योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का मिलन हो रहा है, जो अत्यंत दुर्लभ और शुभ योग माना जाता है। गुरु पुष्य योग को सम्पत्ति, सफलता और समृद्धि का योग माना जाता है, जिसमें निवेश करना, नए कार्य की शुरुआत करना अत्यंत लाभकारी होता है। यही नहीं, इस योग में किए गए अन्य शुभ कार्यों में भी सफलता की संभावना अधिक रहती है।
सर्वार्थ सिद्धि योग का योग मनोकामना सिद्धि और हर तरह की सुख-समृद्धि प्राप्ति के लिए जाना जाता है। इस योग में कर्म करने से कार्यों में सफलता की उम्मीद बढ़ जाती है। धार्मिक विद्वानों के अनुसार जो लोग लंबे समय से नए काम की शुरुआत करने का विचार कर रहे हैं, उनके लिए यह विशेष समय अत्यंत उपयुक्त एवं अनुकूल है। इस दिन गणेश जी की पूजा से मानसिक तनाव में कमी आती है तथा सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
प्रद्युम्न चतुर्थी 2026 पूजा मुहूर्त और विधि
वैदिक पंचांग के अनुसार प्रद्युम्न चतुर्थी तिथि 17 जून 2026 की रात 9:38 बजे प्रारंभ होकर 18 जून 2026 की शाम 6:58 बजे तक रहेगी। व्रत और पूजा 18 जून को की जाएगी। पूजा के प्रमुख शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं:
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:03 बजे से 4:43 बजे तक
- मध्याह्न पूजा मुहूर्त: सुबह 10:58 बजे से दोपहर 1:46 बजे तक
- विजय मुहूर्त: दोपहर के समय शुभ कार्यों के लिए विशेष माना गया है।
पूजा के लिए स्नान करके साफ कपड़े पहनें और व्रत का संकल्प लें। घर के पूजा स्थल को साफ कर लाल या पीला वस्त्र बिछाएं तथा गणेश जी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। दीपक जलाएं, लाल फूल, दूर्वा, अक्षत और चंदन चढ़ाएं। मोदक, बेसन के लड्डू या अन्य मिठाई का भोग लगाएं।
पूजा के दौरान “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का जाप करें और गणेश कथा का पाठ करें। अंत में आरती करें और परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें। श्रद्धा और पूर्ण विधि के साथ की गई पूजा जीवन में सुख, समृद्धि और बाधाओं से मुक्ति का कारण बनती है, इसलिए प्रद्युम्न चतुर्थी को गणेश भक्तों के महत्वपूर्ण व्रतों में गिना जाता है।
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