चीन की आर्थिक वृद्धि में तेज गिरावट, लक्ष्य से चूक

बीजिंग, चीन – चीन की आर्थिक वृद्धि में इस तिमाही तेज गिरावट आई है, जिससे देश के सरकार द्वारा निर्धारित विकास लक्ष्य को प्राप्त करने में असफलता हुई है। घरेलू मांग की कमजोरी और ईरान युद्ध के कारण तेल कीमतों में बदलाव ने चीन के मजबूत निर्यात पर भी गहरा असर डाला है।
विशेषज्ञों के अनुसार, चीन की अर्थव्यवस्था पर घरेलू उपभोक्ता मांग में कमी सबसे बड़ा असर डाल रही है। महामारी के बाद धीरे-धीरे आर्थिक गतिविधियाँ पुनः सामान्य हुईं, लेकिन उपभोग का स्तर अभी भी अपेक्षित गति से नहीं बढ़ पाया है। इससे फैक्ट्री उत्पादन और निवेश में मंदी देखी गई है।
वहीं, क्षेत्रीय तनाव और ईरान में युद्ध की स्थिति से तेल की वैश्विक कीमतों में अस्थिरता बनी हुई है, जिसका सीधा प्रभाव चीन के ऊर्जा आयात पर पड़ा है। तेल की महंगाई से उत्पादों की लागत बढ़ी है और इससे निर्माता कंपनियों को अपनी प्रतिस्पर्धात्मकता बनाए रखने में कठिनाई हुई है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, चालू तिमाही में चीन की जीडीपी वृद्धि दर लक्षित 6% के मुकाबले करीब 4.3% तक सीमित रही, जो पिछले साल की तुलना में काफी नीचे है। निर्यात में शुरुआती मजबूती के बावजूद घरेलू बाजार की कमजोर पकड़ ने कुल आर्थिक प्रदर्शन को प्रभावित किया है।
चीन के वित्त मंत्री ने पिछले सप्ताह कहा था कि सरकार आर्थिक स्थिरता बनाए रखने और विकास को पुनर्जीवित करने के लिए कई कदम उठा रही है, जिसमें कर राहत, निवेश प्रोत्साहन, और घरेलू उपभोग बढ़ाने के उपाय शामिल हैं।
वहीं, व्यापार विश्लेषकों का मानना है कि ईरान युद्ध के खतरे के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बनी रहेगी, जो न केवल चीन बल्कि अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए भी चुनौती भरा रहेगी।
चीन की इस आर्थिक सुस्ती का सबसे बड़ा असर आम जनता पर पड़ सकता है, क्योंकि रोजगार के अवसर सीमित हो सकते हैं और महंगाई में बढ़ोतरी हो सकती है। इसके बीच सरकार की प्राथमिकता अर्थव्यवस्था को पुनः गति देना और उपभोक्ता विश्वास बहाल करना होगा।
वर्ष 2024 के बाकी हिस्सों में चीन की आर्थिक स्थिति कैसे विकसित होती है, इस पर वैश्विक बाजारों की नजर बनी हुई है। विशेषज्ञ सुझाव दे रहे हैं कि सरकार को घरेलू मांग को मजबूत करने के साथ-साथ वैश्विक ट्रेड तनावों को कम करने के प्रयास जारी रखने होंगे।




