कांग्रेस ने मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड पुनर्गठन में हिंदू सदस्यों को शामिल करने का विरोध किया, सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की योजना बनाई

भोपाल, मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश में वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन और उसमें दो हिंदू सदस्यों के शामिल किए जाने के फैसले ने राजनीतिक हलकों में गर्मी ला दी है। कांग्रेस नेताओं ने इस निर्णय को अनुचित बताते हुए इसका विरोध किया है और उन्होंने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का संकल्प लिया है।
सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने हाल ही में वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन किया है जिसमें दो हिंदू सदस्यों को पहली बार शामिल किया गया है। यह 10 सदस्यीय बोर्ड नए वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 के तहत गठित किया गया है। इस बोर्ड के अध्यक्ष संवर पटेल हैं, जिनका यह दूसरा कार्यकाल है।
कांग्रेस के एक विधायक अरिफ मसूद ने बताया कि वक्फ एक्ट से जुड़ा मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। ऐसे में शीर्ष अदालत के अंतिम निर्णय से पहले इस तरह का पुनर्गठन गलत है और इससे कई कानूनी सवाल उठते हैं। कांग्रेस नेता पीसी शर्मा ने भी भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा कि यह कदम धार्मिक भेदभाव को बढ़ावा देने और माहौल को भड़काने के लिए उठाया गया है। उनका कहना है कि सरकार राम मंदिर में चोरी के मामले से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है।
वहीं भाजपा नेताओं ने इस फैसले का बचाव करते हुए कहा कि वक्फ बोर्ड केवल मस्जिदों तक सीमित नहीं है और इसकी भूमिका व्यापक है। राज्य मंत्री विश्वास सरंग ने कहा कि मध्य प्रदेश पहला ऐसा राज्य है जिसने नए अधिनियम के तहत हिंदू सदस्यों को वक्फ बोर्ड में शामिल किया है और इसका समाज पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने कांग्रेस की आलोचना करते हुए इसे राजनीतिक मुद्दा बनाने का आरोप लगाया।
मध्य प्रदेश के विधायक रमेश्वर शर्मा ने कहा कि वक्फ बोर्ड की जमीन भारत की है और यह सबका साझा धरोहर है। उन्होंने कहा कि हिंदू सदस्य भी गरीबों की भलाई के लिए प्रतिबद्ध होंगे और जिन्हें वक्फ संपत्ति में अवैध फायदा था, वे इससे परेशान होंगे।
प्रदेश सरकार के एक अधिसूचना के अनुसार, वर्तमान वक्फ बोर्ड में संवर पटेल, नजमा हप्टुल्ला, अतीफ अकील, फैजान खान, फातिमा चौधरी, शाइस्ता सुलतान, शबाना खान, मनोज मलपानी और अनीमेश भार्गव सदस्य हैं। साथ ही पिछड़े वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के आयुक्त बोर्ड के पदेन सदस्य हैं।
वक्फ बोर्ड एक संवैधानिक निकाय है जो राज्य में वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन और संरक्षण के लिए जिम्मेदार है। इसका मुख्य कार्य वक्फ संपत्तियों का रिकॉर्ड रखना, उनके उपयोग की निगरानी करना, अवैध अतिक्रमण से उन्हें बचाना और धार्मिक, शैक्षिक एवं सामाजिक कल्याण के लिए उनका उचित उपयोग सुनिश्चित करना है।
इस मुद्दे पर चल रही बहस स्पष्ट करती है कि मध्य प्रदेश में वक्फ बोर्ड को लेकर राजनीतिक और कानूनी जटिलताएं गहराती जा रही हैं। आने वाले समय में सुप्रीम कोर्ट की कार्रवाई इस विवाद का अंतिम समाधान निकाल सकती है। फिलहाल, भाजपा सरकार अपनी नीतियों और पुनर्गठन पर कायम है, जबकि विपक्ष सडकों से लेकर कानूनी मंच तक संघर्ष जारी रखने की तैयारी में है।



