केंद्र ने जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा लौटाने का वादा किया है; मुझे विश्वास है कि यह होना चाहिए: डॉ करण सिंह

श्रीनगर, जम्मू और कश्मीर। केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर को पुनः राज्य का दर्जा देने का वादा किया है और इस आशय की घोषणा ने इस विगत वर्षों से चले आ रहे विवाद एवं असमंजस को खत्म करने की उम्मीदों को पुनर्जीवित किया है। डॉ. करण सिंह, जो इस क्षेत्र के पूर्व राजप्रतिनिधि एवं एक वरिष्ठ राजनेता हैं, ने इस विषय पर अपनी राय प्रकट करते हुए कहा कि राज्य का दर्जा बहाली होना चाहिए और यह एक आवश्यक कदम है जो क्षेत्र के स्थायित्व एवं विकास के लिए हितकारी सिद्ध होगा।
डॉ. करण सिंह ने कहा, “जब केंद्र सरकार ने प्रतिबद्धता जताई है, तो हमें पूर्ण विश्वास करना चाहिए कि यह वादा निभाया जाएगा। राज्य का दर्जा वापस मिलना जम्मू-कश्मीर के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक भविष्य को सुरक्षित करेगा। यह सिर्फ एक प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि हमारे लोकतंत्र की भावना की भी पुष्टि है।”
ज्ञात हो कि अगस्त 2019 में जम्मू-कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा वापस लेकर केंद्र सरकार ने इसे दो केंद्रशासित प्रदेशों में विभाजित कर दिया था। इस कदम के बाद से क्षेत्र की राजनीति और यहां के लोगों के मनोबल में काफी उथल-पुथल मची है। उस समय से ही राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग उठती रही है और अब जब केंद्र सरकार ने इसे दोहराया है, तो यह एक बड़ी राजनीतिक और संवैधानिक चर्चा का विषय बन गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि राज्य का दर्जा वापसी से न केवल स्थानीय राजनीति में स्थिरता आएगी, बल्कि निवेश एवं विकास योजनाओं को भी बढ़ावा मिलेगा। इसके साथ ही सुरक्षा परिदृश्य में सुधार की भी उम्मीद जताई जा रही है क्योंकि स्थानीय लोगों को उनकी पहचान और अधिकार पुनः मिलेंगे।
डॉ. करण सिंह ने यह भी कहा कि जम्मू-कश्मीर में शांति कायम रखने के लिए संवाद आवश्यक है, जिसके तहत अलग-अलग राजनीतिक दलों और नागरिक समाज को एक साथ लेकर चलना होगा। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि वे इस दिशा में पारदर्शिता और खुले मन से काम करें ताकि क्षेत्र के लोगों का विश्वास पुनः कायम हो सके।
इस विषय पर राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्य का दर्जा बहाली एक संवेदनशील मुद्दा है और इसे ध्यानपूर्वक और समझदारी से लागू करना होगा, जिससे किसी प्रकार की असहमति या तनाव न उत्पन्न हो। इसके लिए राज्य के विभिन्न वर्गों की अपेक्षाओं व चिंताओं को भी ध्यान में रखना आवश्यक होगा।
जम्मू-कश्मीर के नागरिकों के लिए यह खबर राहत की है कि उनकी आवाज़ अब केंद्र सरकार द्वारा सुनी जा रही है और राज्य का दर्जा बहाल होने पर वे अपने अधिकारों एवं स्वायतता के साथ जीवन जी सकेंगे। हालाँकि अभी भी इस प्रक्रिया के लिए कई कानूनी और प्रशासनिक पहलुओं पर काम होने की जरूरत है।
अतः केंद्र सरकार के इस वादे को पूरा करना जम्मू-कश्मीर के पुनर्निर्माण व विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा, जिससे क्षेत्र के लोगों को न्याय और सम्मान मिलेगा तथा सामाजिक और आर्थिक उन्नति संभव होगी।




